न्यूज़ डेस्क – मणिपुर में गुरुवार को फिर से वही हुआ जो अक्सर होता है – हिंसा। एक तरफ एक मैतेई किसान धान की फसल काट रहा था, उधर किसी ने उसे सीधे गोली मार दी। किसान की जान तो बच गई, लेकिन फसल के साथ-साथ अब भरोसा भी खतरे में है।
बिष्णुपुर जिले में एक किसान – निंगथोजम बीरेन सिंह – सुबह-सुबह धान के खेत में थे। लेकिन किसी को उनका खेती करना इतना बुरा लगा कि सीधे गोली मार दी। खुद को तो नहीं, लेकिन फसल को शायद बुलेटप्रूफ बनाना चाहिए अब।
फायरिंग का जवाब फायरिंग से दिया गया, और इसी बीच होइखोलहिंग नाम की महिला की मौत हो गई – जो गांव के प्रधान की पत्नी थीं। सवाल ये है कि अब गांव में सिर्फ नेता ही नहीं, उनकी पत्नियां भी ‘लक्ष्य’ बन रही हैं।
पुलिस हर बार की तरह ‘तलाशी अभियान’ चला रही है और कह रही है कि “हम देखेंगे कि अगली बार ऐसा न हो।” बस, अगली बार कब है – वो किसी को नहीं पता।
मैतेई और कुकी समुदायों के बीच बफर जोन बना है, लेकिन अब वो बफर जोन से ज्यादा ‘बिलकुल-भी-सेफ-नहीं’ ज़ोन लगता है।
