6 सितम्बर 2022 मंगलवार को एकादशी प्रारंभ हो रही है। जो कि सुबह 5ः55 से सात सितम्बर बुधवार को सुबह 3ः04 तक रहेगी। लेकिन इस बार 7 सितम्बर बुधवार को एकादशी का व्रत उपवास करना फलदायी रहेगा। एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं बताया गया है। जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से प्राप्त होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य इस एकादशी के व्रत से होता है। जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ करने से मिलता है। उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से प्राप्त होता है।
एकादशी करने वालों के पितर नीच योनि से मुक्त हो जाते हैं। परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसती हैं। व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है। इसी के साथ धन-धान्य, पुत्र इत्यादी की वृद्धि होती है। एकादशी का व्रत करने से कीर्ति में बढ़ोत्तरी होती है। श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है। जिससे जीवन रसमय बनता है। इसी के साथ परमात्मा की प्रसन्नता होती है। नारद ने कहा है कि एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है। एकादशी के दिन दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम करें। विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो दस माला गुरुमंत्र का जप करने से घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हो जाएंगे। ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे। घर में खुशियां आएगी और धन-धान्य से भी परिपूर्ण होंगे।

