मंगल संयोग- इस बार छोटी – बड़ी दोनों दिवाली एक दिन

रसोई Bytesमंगल संयोग- इस बार छोटी – बड़ी दोनों दिवाली एक दिन

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मंगल संयोग- इस बार छोटी – बड़ी दोनों दिवाली एक दिन

499 सालों के बाद दिवाली के ठीक एक दिन पहले धनतेरस

दिवाली के दो दिन पहले पड़ने वाले धनतेरस का त्योहार इस बार दिवाली के ठीक एक दिन पहले मनाया जायेगा। दिवाली पर लगातार पांच दिन चलने वाला पांच दिनी पंचोत्सव इस बार तिथि के फेर के चलते चार दिन में ही सिमट जाएगा। इसके बाद छोटी और बड़ी दोनों दिवाली का संयोग एक ही दिन पड़ रहा है।

त्रयोदशी की उदया तिथि और प्रदोष काल में होने की वजह से 499 साल बाद ऐसा योग बन रहा है। इससे पहले ऐसा योग सन् 1521 में बना था। 13 नवंबर को धनतेरस के साथ ही शाम को नरक चतुर्दशी की भी पूजा होगी। 14 को स्वाती नक्षत्र में दिवाली का पूजन होगा। दिवाली का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 10 मिनट रहेगा। विशेषकर व्यापारियों के लिए का शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 6 मिनट से 3 बजकर 33 मिनट तक है। इस दिन शुभ और पितृकर्म दोनों प्रकार के कार्यों का अवसर प्रदान करता है। तर्पण करने से विशेष पुण्य मिलेगा।

दिवाली के दिन विशेषकर गणेश और लक्ष्मी की आराधना की जाती है। साथ ही कुबेर की भी आराधना की जाती है। इसके अलावा सरस्वती जी और हनुमान जी की भी पूजा की जाती है। गाय के घी और कमल के दाने से माता लक्ष्मी जी के लिए हवन भी किया जाता है। दीपावली पर दक्षिणावर्तीं शंख, श्री यंत्र, गोमती चक्र, मां लक्ष्मी, कुबेर यंत्र, हल्दी की गांठ और छोटा नारियल के साथ पूजन करना चाहिए।

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