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‘मन चंगा, तो कठौती में गंगा’


‘मन चंगा, तो कठौती में गंगा’

पंडित सुनील उपाध्याय,

धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में गंगा मैया की महिमा का बखान किया गया है। शास्त्रों के अनुसार पतित पावनी मां गंगा के पवित्र जल में स्नान करने से पापों का नाश होता है। यूं तो मां गंगा के जल में डुबकी लगाने का कोई भी दिन बड़े सौभाग्य से ही मिलता है मगर गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करने से पाप कर्मों का नाश होता है। कहा जाता है कि गंगा स्नान करने वाले भक्त को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण श्रद्धालु गंगा स्नान करने से वंचित रह जायेंगे। मगर कहा गया है, ‘मन चंगा, तो कठौती में गंगा’ अर्थात सच्चे मन से मां गंगा की प्रार्थना करें तो वह स्वयं आपके समीप आकर आपको आशीर्वाद देंगी।

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन ही ऋषि भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा धरती पर आईं थीं। इस बार गंगा दशहरा रविवार, 20 जून को पड़ रहा है। गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। गंगा में आस्था की डुबकी लगाने से पापों का नाश होता है और पापी भी इहलोक में दोष से मुक्त हो जाते हैं। मगर कोरोना संक्रमण के खतरे से लोगोें को बचाने के लिये गंगा दशहरा मेले के आयोजन पर प्रतिबंध है। लेकिन मां गंगा की कृपा पाने आप घर पर ही विधि-विधान से स्नान-पूजन कर प्राप्त कर सकते हैं।

गंगा दशहरा के दिन सुबह जल्दी उठकर अपने घर पर ही पानी में कुछ बूंदे गंगाजल व थोड़ी सी हल्दी मिलाकर स्नान करें और मां गंगा की पूजा-अर्चना करें। मां गंगा रूपी गंगाजल का अपने घर के पूजा स्थल पर विधि-विधान अनुसार पूजन करने से गंगा मैया की कृपा आपको प्राप्त होगी। अपनी इच्छानुसार गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों में दान करें। सच्चे मन से की गयी पूजा से मां गंगा निश्चित ही आपसे प्रसन्न होंगी और उनकी कृपा से आपके द्वारा किये गये पापों का नाश होगा।

करें गंगा मैया जी की आरती

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता,
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
चंद्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता।
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
आरति मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता।
सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।

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