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Congress Prez Poll: गांधी परिवार के आर्शिवाद से मिले अध्यक्ष पद पर बैठ कैसे भाजपा से मुकाबला कर पाएंगे मल्लिकार्जुन खड़गे

नई दिल्ली। देर रात जब मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी संभालने का प्रस्ताव मिला तो यह एक चौकाने वाला फैसला था। कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के नामांकन भरने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम सामने आया और उन्होंने भी अपना नामांकन पार्टी अध्यक्ष पद के लिए कर दिया है। अब जबकि सब कुछ स्पष्ट है कि संभवतः खड़गे को ये ज़िम्मेदारी गांधी परिवार के आशीर्वाद से मिलेगी। तो ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि खड़गे स्वतंत्ररूप से कैसे भाजपा और केंद्र की मोदी सरकार का मुकाबला कर पाएंगे।  राजनैतिक विश्लेषक का मानना है कि कांग्रेस संभवतः खड़गे को अध्यक्ष चुनकर देश को संदेश देना चाहती है कि वो पार्टी के आहत नेताओं को राहत देने और सभी धड़ों के बीच तनाव कम करने के मामले में काफ़ी दक्ष हैं। लेकिन खड़गे ऐसे नेता नहीं है जो दूसरे से किसी भी तरह की लड़ाई करेंगे। 

कांग्रेस के असंतुष्ट समूह जी-23 से जुड़े नेताओं के उनके नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करने में ये कमी दिखती है। भूपिंदर सिंह हुड्डा, मुकुल वासनिक, आनंद शर्मा ये तीनों ही जी-23 का हिस्सा थे। वहीं एके एंटनी, अशोक गहलोत, तारिक़ अनवर और दिग्विजय सिंह गांधी परिवारा के पक्के वफ़ादार हैं। अगर खड़गे पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव जीत जाते हैं तो पार्टी के सामने एक चुनौती होगी। खड़गे विंध्य पर्वतमाला के दक्षिण से आते हैं। उनके दलित होने का फ़ायदा कांग्रेस को मिल सकता है। लेकिन दक्षिण भारत की राजनीति उत्तर भारत की राजनीति से बिल्कुल अलग है। ख़ासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जहां कांग्रेस कमज़ोर स्थिति में है।

खड़गे जानते हैं कि ऐसे समय में जब कांग्रेस सबसे बुरे संकट का सामना कर रही है जो सिर्फ़ संस्थागत या ढांचागत स्तर तक सीमित नहीं है। इसके लिए कांग्रेस के सामने वैचारिक नेतृत्व का संकट है। गांधी परिवार के पास उनके जैसे वफ़ादार पर भरोसा करने के अलावा संभवतः और कोई विकल्प नहीं है। खड़गे एक ऐसे व्यावहारिक व्यक्ति हैं जो अपनी ताक़त और कमज़ोरी दोनों को भलीभांति जानते हैं। खड़गे राज्य की राजनीति से निकलकर लोकसभा और फिर राज्यसभा तक जाने वाले ऐसे नेता हैं जो अपने सामने पेश आने वाली चुनौतियों को जानते हैं। ख़ासकर भाजपा की मज़बूत मशीनरी को। जिसका नेतृत्व पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह कर रहे हैं। ऐसे में अगर खड़गे कांग्र्रेस के अध्यक्ष बनते हैं तो उनके सामने तमाम तरह की चुनौतियां होगी।

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