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कानपुर में बड़ी लापरवाही, सीवर सफाई में जा सकती हैं जानें


कानपुर में बड़ी लापरवाही, सीवर सफाई में जा सकती हैं जानें

रोहन वर्मा

कानपुर में बिना मानक के पालन किए सीवर सफाई का काम कराया जा रहा है. ताजा मामला जूही खुर्द का है. नगर निगम के अभियंत्रण और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही युवक की जान तक ले सकती थी. बताया जा रहा है कि कई दिनों से सीवर सफाई का काम यहां िकिया जा रहा है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की जो गाइडलाइन सीवर और नाला साफ कराने को लेकर उसका पालन नहीं किया जा रहा है.

जेटीएन कम्पनी के पास है ठेका
जूही खुर्द में नगर निगम की ओर से नाला और सीवर सफाई का काम जोरों पर है. लेकिन सफाईकर्मीयों की सुरक्षा को ताक पर रखकर नालों औश्र सीवर की सफाई कराई जा रही है. जेटीएन कम्पनी के पास नाला और सीवर सफाई का ठेका है. सफाईकर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया िकि करोड़ों रुपए का ठेका राजन शुक्ला ने लिया है. लेकिन वो उपकरण मुहैया नहीं कराता. मांगने पर कहता है कि जहां चाहो वहां शिकायत कर लो सबका हिस्सा बंधा है.

यूपी में हो चुकी हैं सबसे ज्यादा मौतें
सफाईकर्मियों की सुरक्षा से जुड़े तमाम प्रयासों और दावों के बावजूद पिछले तीन वर्षों में सीवर की सफाई करने के दौरान कुल 271 लोगों की जान चली गई और इनमें से 110 मौतें सिर्फ 2019 में हुई हैं.केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की ओर से सूचना के अधिकार के तहत प्रदान किए गए आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है.आयोग के अध्यक्ष मनहर वालजीभाई जाला का कहना है कि सफाई के लिए आधुनकि मशीनों की सुविधाएं नहीं होने और ज्यादातर जगहों पर अनुबंध की व्यवस्था होने से सफाईकर्मियों की मौतें हो रही हैं.सफाई कर्मचारी आयोग की ओर से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2019 में सीवर की सफाई के दौरान 110 लोगों की मौत हुई. इसी तरह 2018 में 68 और 2017 में 193 मौतें हुईं.प्रदेश स्तर पर सफाईकर्मियों की काम के दौरान हुई मौत के आंकड़े की बात करें तो पिछले तीन वर्षों में सबसे ज्यादा 50 मौतें उत्तर प्रदेश में हुई हैं.

कोई भी देश मरने के लिए सीवर चैंबर में नहीं भेजता
पिछल साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सीवर सफाई के दौरान हो रही मौतें पर चिंता जताई थी.जस्टिस अरुण मिश्रा, एमआर शाह और बीआर गवई की बेंच ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से सवाल किया कि आखिर हाथ से मैला साफ करने और सीवर के नाले या मैनहोल की सफाई करने वालों को मास्क व ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं मुहैया कराई जाते हैं? दुनिया के किसी भी देश में लोगों को गैस चैंबर में मरने के लिये नहीं भेजा जाता है. इस वजह से हर महीने चार से पांच लोगों की मौत हो जाती है. बेंच ने कहा, ‘संविधान में प्रावधान है कि सभी मनुष्य समान हैं, लेकिन प्राधिकारी उन्हें समान सुविधाएं मुहैया नहीं कराते.’

अधिकारी या प्राधिकारी को घटना के लिए ठहराया जाए जिम्‍मेदार

बेंच ने स्थिति को अमानवीय करार देते हुए कहा कि बिना सुरक्षा उपकरणों के सफाई करने वाले लोग सीवर और मैनहोल में अपनी जान गंवा रहे हैं. वेणुगोपाल ने बेंच से कहा था कि देश में नागरिकों को होने वाली क्षति और उनके लिए जिम्मेदार लोगों से निपटने के लिये अपकृत्य कानून (लॉ ऑफ टॉर्ट) बना नहीं है. ऐसी घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेने का मजिस्ट्रेट को अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि सड़क पर झाडू लगा रहे या मैनहोल की सफाई कर रहे व्यक्ति के खिलाफ कोई मामला दायर नहीं किया जा सकता, लेकिन ये काम करने का निर्देश देने वाले अधिकारी या प्राधिकारी को इसका जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.

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