उत्तरकाशी। देवभूमि उत्तराखंड में मंदिरों की अपनी अलग अलग मान्यता और परम्परा है. आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताते है जिसके देवता को न्याय का देवता और मंदिर को न्यायालय के रूप में माना जाता है.मान्यता है कि भक्त महासू देवता के मंदिर में न्याय की गुहार करते है जो पूरी होती है. इस मंदिर में हर साल दिल्ली के राष्ट्रपति भवन से लाया गया नमक चढ़ाया जाता है. उत्तरकाशी के हनोल में स्थित महासू देवता का मंदिर अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है.इस मंदिर के गर्भगृह में किसी भी श्रद्धालु को जाने की इजाजत नहीं है. केवल पुजारी ही इस मंदिर के गर्भगृह में जा सकते है. माना जाता है कि महासू देवता को कश्मीर से लाया गया था.
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चार भाइयों का महासू मंदिर
महासू का अर्थ महाशिव माना जाता है.दरअसल ‘महासू देवता’ एक नहीं चार देवताओं का सामूहिक नाम है. चारों महासू भाइयों के नाम बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू (बौठा महासू) और चालदा महासू है, जो कि भगवान शिव के ही रूप हैं. कहा यह भी जाता है की शिव और शक्ति के आशीर्वाद से चार भाई जिन्होंने क्रमिक नामक राक्षस का वध करके वहां के लोगों को मुक्त किया. मंदिर के गर्भ गृह में पानी की एक धारा भी निकलती है, लेकिन वह कहां जाती है, कहां से निकलती है यह अज्ञात है.
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शर्त में जीता था मंदिर
9वी शताब्दी में बनाया गया यह मंदिर मौजूदा समय में एएसआई के संरक्षण में है.माना जाता है की महासू ने किसी शर्त पर हनोल का यह मंदिर जीता था. महासू देवता को हिमाचल,उत्तराखंड और जौनसार बावर का ईस्ट देव कहा जाता है. मान्यता यह भी है कि पांडव लाक्षा गृह से निकलकर यंहा आये थे.
