विचार चित्रण – तब / अब

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महाराष्ट्र में सत्ता पलट होने के बाद भी बहुत से तकनीकी पेंच फंसे हुए हैं जो नवागंतुक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए समस्या कड़ी किये हुए हैं. राज्यपाल ने उन्हें सोमवार को अपना बहुमत साबित करने को कहा है, उससे पहले कल विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होना है, शिव सेना (उद्धव ठाकरे) ने पार्टी के सभी 55 विधायकों को व्हिप जारी कर शिंदे गुट को परेशानी में डाल दिया है. अयोग्यता का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है, अभी इसपर भी कोई फैसला नहीं हुआ कि शिंदे गुट असली शिवसेना है या फिर कोई अलग पार्टी, ऐसे में असली नकली पार्टी के साथ ही असली नकली व्हिप की भी बात हो रही है. शिंदे कह रहे हैं कि ये व्हिप उनके गुट पर नहीं लागू होता।   

वहीँ शिवसेना उद्धव गुट के नेता सुनील प्रभु के मुताबिक MVA सरकार के दौरान स्पीकर पद पर चुनाव ओपन मतदान से किये जाने का फैसला लिया गया था. बीजेपी के दो नेता इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए थे और तब से यह मामला लंबित है. बता दें कि राज्यपाल ने पिछले सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव कराने से मना कर दिया था. राज्यपाल कोशियारी का कहना था कि मामला अदालत में है ऐसे में स्पीकर का चुनाव नहीं हो सकता है, लेकिन सत्ता बदलते ही राज्यपाल अब स्पीकर का चुनाव कराने के लिए तैयार हो हैं, अब एक ही मामले में राज्यपाल दो फैसले कैसे ले सकते हैं?  

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शिंदे ग्रुप के साथ पेंच यह फंसा है कि आधिकारिक रूप से न तो उसे मान्यता मिली है और न ही उसका किसी अन्य पार्टी में अभी तक विलय हुआ है, ऐसे में जब तक इन दोनों में से कोई एक स्थिति नहीं हो जाती तो उसे शिवसेना का आधिकारिक व्हिप मानना पड़ेगा जो कि सुरेश प्रभु ने जारी किया है. वहीँ एकनाथ शिंदे का कहना है कि उनके पास शिवसेना के विधायकों का बहुमत है इसलिए उनके गुट द्वारा जारी व्हिप को शिवसेना के बचे हुए 16 विधायकों को मानना पड़ेगा। लेकिन संविधान के 10वीं अनुसूची का नियम इसकी इजाज़त नहीं देता। ऐसे में सवाल यह है कि कल विधानसभा अध्यक्ष पद के चुनाव में किसका व्हिप वैद्य माना जायेगा।

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