बुधवार को सुबह महाकुंभ के संगम क्षेत्र में भगदड़ मचने से 20 लोगों के हताहत होने की बात कही जा रही है, प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने शोक सन्देश में मौतों की बात स्वीकारी है और कहा है कि जिन श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं वहीँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रशासन मौतों की बात पर चुप्पी साधे हुए है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सन्देश में कुछ श्रद्धालुओं के गंभीर रूप से घायल होने की बात कही है.
भगदड़ के बाद लखनऊ में एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने कहा कि रात 1 से 2 बजे के बीच अखाड़ों के मार्ग कुछ श्रद्धालु बैरिकेड्स पार कर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार सुनिश्चित किया गया। हालाँकि भगदड़ के बाद वहां अपने प्रियजनों को खोने वाले रोते बिलखते हुए नज़र आये. एक श्रद्धालु ने अपनी मां को खो दिया, उसकी विडिओ सोशल मीडिया पर वायरल है जो बिलख बिलख कर रोते हुए कह रहा है कि उसकी माँ ने उसके सामने ही दम तोड़ दिया। सवाल यह उठता है कि योगी आदित्यनाथ मौतों को क्यों छिपा रहे हैं, हालाँकि अब यह बात कन्फर्म हो चुकी है कि कई मौतें हुई हैं, संख्या को लेकर ज़रूर मीडिया रिपोर्ट थोड़ी अलग हैं.
महाकुम्भ में इस तरह की घटना होना कोई हैरानी की बात नहीं है. जहाँ एक दिन में करोड़ों लोगों की मौजूदगी हो वहां भीड़ के बीच थोड़ी सी भी हलचल में जनहानि होना कोई हैरानी की बात नहीं है. इस तरह के आयोजनों के दौरान चंद मिनटों में ही बहुत कुछ हो जाता है और फिर जल्द ही सबकुछ संभल भी जाता है और यह भी वहां पर मौजूद आम लोग ही संभालते हैं क्योंकि भगदड़ जैसे हालात पर सुरक्षाकर्मी भी असहाय हो जाते हैं और इससे पहले वो कुछ कर सकें भीड़ बहुत से लोगों को कुचल देती है. फिलहाल महाकुम्भ में तो सबकुछ कंट्रोल में बताया जा रहा है और मौतों को छुपाया जा रहा है.

