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माघ मेला देर से शुरू होने से पंचकोसी परिक्रमा 1 फरवरी से होगी


माघ मेला देर से शुरू होने से पंचकोसी परिक्रमा 1 फरवरी से होगी

28 जनवरी को पौष पूर्णिमा के बाद शुरू होगा माघ माह

न्यूज डेस्क/प्रयागराज। पौराणिक महत्व रखने वाले माघ महीना इस बार देर से शुरू हो रहा है। 28 जनवरी को पौष पूर्णिमा के बाद माघ माह शुरू होगा। इसके कारण प्रयागराज की पंचकोसी परिक्रमा की तारीख बदल कर एक, दो, तीन फरवरी कर दी गयी है। इससे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 21 22 व 23 जनवरी को परिक्रमा की तारीख निर्धारित थी। नयी तिथियों पर होने वाली पंचकोसी परिक्रमा का इंटरनेट के माध्यम से सीधा प्रसारण किया जायेगा।

भारत के सर्वाधिक पवित्र तीर्थस्थलों में से एक प्रयाग का माघ मेला विश्व का सबसे बड़ा मेला है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास में प्रयागराज में समस्त देवी-देवताओं का वास होता है। इसी कारण माघ मास में संगम तीरे कल्पवास किया जाता है। हिन्दु पुराणों में वर्णित है कि सृष्टि के सृजनकर्ता भगवान ब्रह्मा ने तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर प्राकृष्ठ यज्ञ संपन्न किया था। भगवान ब्रह्मा द्वारा इसे तीर्थ राज अथवा तीर्थस्थलों का राजा कहा गया है। प्रत्येक वर्ष जनवरी-फरवरी माह में मकर संक्रांति को आरंभ होकर फरवरी में महा शिवरात्रि तक पवित्र संगम के किनारे विश्व प्रसिद्ध माघ मेला आयोजित होता है। माघ मास में पंचकोसी परिक्रमा करने का भी विधान है। माघ मेला में देश भर से करोड़ो श्रद्धालु आकर स्नान कर पुण्य प्राप्त करते हैं।

घाटों के आसपास श्रद्धालुओं के पलायन का खतरा टला
माघ मेला में संगम का जल साफ करने के लिए कानपुर बैराज से छोड़ा गया दो हजार क्यूसेक अतिरिक्त पानी से संगम का जलस्तर बढ़ गया और कटान होने लगा था। जिससे मेला क्षेत्र के सेक्टर चार और पांच में किनारे बने शिविरों की भूमि गंगा में समा जाने का खतरा बढ़ गया। खतरे को देखते हुए कई शिविरों का अन्यत्र बसाया गया और कटान रोकने को बालू की बोरियां लगानी पड़ीं। लेकिन अब बैराज से जल का डिस्चार्ज कम किये जाने से गंगा का जलस्तर कम हो गया है। इससे घाटों के आसपास श्रद्धालुओं के पलायन का खतरा भी टल गया है।

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