देश की सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट प्रतियोगिता में पहली बार इतिहास बनाते हुए मध्य प्रदेश ने कब्ज़ा किया है, उसने मुंबई को 6 विकेट से धराशायी करते हुए खिताब को जीता है. बता दें कि मध्य प्रदेश का सामना 41 बार की चैम्पियन मुंबई से था जिसकी कप्तानी पृथ्वी शॉ कर रहे थे वहीँ मध्य प्रदेश की कमान आदित्य श्रीवास्तव के हाथों में थी.
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फाइनल मैच के चौथे दिन मुंबई की टीम ने दूसरी पारी में 269 रन बनाते हुए मध्य प्रदेश के सामने 108 रन का लक्ष्य रखा था जिसे एमपी की टीम ने 29.5 ओवर में सिर्फ चार विकेट गवांकर हासिल किया. मध्य प्रदेश की दूसरी पारी में हिमांशु मंत्री ने सबसे ज्यादा 37 रनों की पारी खेली जबकि मुंबई के शम्स मुलानी ने गिरने वाले चार विकटों में से तीन विकेट चटकाए.
मुंबई ने अपनी पहली पारी में 374 रन बनाए थे जिसमें सरफराज खान का शतक (134 रन) शामिल था . सरफ़राज़ के अलावा यशस्वी जायसवाल ने 78 और कप्तान पृथ्वी शॉ ने 47 रनों की पारी खेली थी. वहीँ मध्य प्रदेश के लिए गौरव यादव ने चार और अनुभव अग्रवाल ने तीन विकेट चटकाए थे. जवाब में मध्य प्रदेश के तीन बल्लेबाज़ों यश दुबे, शुभम सहरमा और रजत पाटीदार ने शतक जड़े थे. सलामी बल्लेबाज यश दुबे ने 133, शुभम शर्मा ने 116 और रजत पाटीदार ने 122 रनों की पारियां खेली थी. इस तरह मध्य प्रदेश ने 536 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया था. मुंबई के लिए शम्स मुलानी ने पांच विकेट हासिल किये थे .
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मध्य प्रदेश के पहाड़ जैसे स्कोर के दबाव में मुंबई के बल्लेबाज़ दूसरी पारी में बेहतर बल्लेबाज़ी का मुज़ाहेरा न कर सके. सुवेद पार्कर इकलौते ऐसे बल्लेबाज़ रहे जिन्हों ने पचास का स्कोर पार किया , सुवेद ने 51 रन बनाये वहीँ कप्तान पृथ्वी शॉ ने 44 रन बनाकर आउट हुए. मध्य प्रदेश के लिए कुमार कार्तिकेय ने चार विकेट हासिल किये. जीत के लिए मध्य प्रदेश को मिले 108 रनों के लक्ष्य को उन्होंने आसानी से चार विकेट गवांकर हासिल कर लिया और पहली बार रणजी ट्रॉफी का चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया.बता दें कि कोविड-19 महामारी के कारण पिछले दो साल ये टूर्नामेंट नहीं खेला जा सका.
