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लोकसभा चुनाव 2024: धर्म, जाति, हिंदू- मुसलमान से लेकर ईवीएम तक, क्या डर गई है भाजपा?

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पारुल सिंहल

बीते दो आम लोक सभा चुनाव जीतकर देश की सबसे बड़ी पार्टियों में शुमार भारतीय जनता पार्टी की हवा 2024 के लोक सभा चुनावों में बदली हुई है। मतदान के चौथे चरण तक आते आते विकास की बात करने वाले प्रधानमंत्री समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्म, जाति, हिन्दू – मुसलमान से लेकर सांप्रदायिक मुद्दों तक पर उतर आए हैं, वहीं अब ईवीएम हैक होने की घटनाएं भी सामने आ रही है। देश के प्रधानमंत्री की जन सभाओं में हेट स्पीच सुनाई दे रही है। मंगलसूत्र बेचने से लेकर राम मंदिर गिराने तक के उनके भाषणों ने देश को दो धड़ों में बांटने का काम किया है। चुनाव आयोग की गाइडलाइन को दरकिनार कर चुनाव में धर्म और जाति पर उतर आई भाजपा की स्थिति को देख समझा जा सकता है कि वह शायद देश का माहौल भांप गई है। देश से मोदी लहर गायब है। पहले और दूसरे चरण के मतदान से ही भाजपा के समीकरण बिगड़े हुए हैं। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में अधिक मतदान और पार्टी के कोर इलाकों में मतदान ने प्रति उदासीनता से स्पष्ट नजर आ रहा है की हार के डर ने पार्टी की नींदे उड़ा दी हैं।

धार्मिक ध्रुवीकरण पर चुनाव जीतने की कोशिश

दो चुनाव जीतने के बाद भी भाजपा सरकार आमजन के वादों पर खरी नहीं उतर पाई। इस बार लोगों के मन में नाराजगी साफ देखी जा रही है। 2014 के लोकसभा चुनावों में विकास की लहर पर सवार होकर भाजपा ने देश को अच्छे दिनों के कई स्वप्न दिखाए थे। देश में ऊर्जा का संचार दिख रहा था लेकिन नोट बंदी, जीएसटी, काले धन आदि कई मुद्दों पर भाजपा सरकार की किरकिरी हुई। प्रधानमंत्री के तानाशाह रवैए, किसानों के आंदोलन के साथ ही महामारी की त्रासदी ने लोगों के मन में सरकार के प्रति रोष पैदा किया। अच्छे दिनों का फॉर्मूला फेल होने के बाद अब भाजपा धार्मिक ध्रुवीकरण को हवा देने में लगी है।

साम,दाम, दंड भेद पर उतरी भाजपा

विकास के मुद्दों पर फेल भाजपा हिंदू मुसलमान जैसे मुद्दों के जरिए चुनाव जीतने का प्रयास कर रही है। इसी मकसद ने पार्टी ने राम मंदिर और रामायण सीरियल के किरदारों को चुनाव में प्रत्याशी बनाकर उतारा था ताकि हिन्दू मतदाताओं को लुभाया जा सके। सरकारी संस्थानों का निजीकरण, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से लोगों में जबरदस्त रोष है। पेपर लीक होने से लेकर अग्निवीर योजना तक ने भाजपा के प्रति लोगों के मन में अविश्वास पैदा किया है। भाजपा ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए हिन्दू -मुस्लिम जैसे सांप्रदायिक मुद्दों को इन चुनावों में अपना हथियार बना लिया है। हाल ही में प्रधानमंत्री ने राजस्थान, बांसवाड़ा, समेत कई जगहों पर मुस्लिम विरोधी बयान भी दिए।

ईवीएम हैक होने की घटनाओं ने पकड़ा जोर

बीते चुनावों में भ्रष्टाचार, अच्छे दिन जैसे नारों के साथ जीत के दावे करने वाली भाजपा अबकी बार चार सौ पार के नारे के साथ सियासी मैदान में उतरी है। जिसका एजेंडा तीन चरणों तक सिर्फ हिंदू मुस्लिम दिखाई दे रहा है। वहीं चौथे चरण तक आते-आते ईवीएम हैक होने तक की घटनाएं भी सामने आने लगी हैं। सोमवार को चौथे चरण के चुनाव के तहत लखीमपुर खीरी से कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इन वीडियो में मतदाता साइकिल पर बटन दबाने पर फूल की पर्ची निकालने के आरोप लगाते दिखाई दिए। एक अन्य वीडियो में मतदाता ने आरोप लगाया कि बिना वोट दिए ही पीठासीन अधिकारी ने वोट देने की बात कहकर बूथ से वापिस लौटा दिया।

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