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International hindi news: चीन का दिया कर्ज गरीब देशों के लिए बना कहर, जाने पूरा मामला

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International hindi news: पाकिस्तान सहित कई गरीब देशों को चीन का दिया कर्ज कहर बनकर बरसा है। जिसकी मार दूसरे देशों को झेलनी पड़ी है। आर्थिक मंदी से कराह रहे देशों पर चीन ने दया दिखाई और कर्ज दिया। जिसके कारण अब विदेशी लोन में सैकडों अरबों डॉलर की कमी आ गई है। अगर ऐसा रहा तो आने वाले समय में कई देशों की आर्थिक अस्थिरता होने की संभावना है।

जानकारी के अनुसार पाकिस्तान, जाम्बिया, केन्या, लाओस और मंगोलिया सहित एक दर्जन देशों को चीन ने आर्थिक मंदी से उबरने के लिए कर्ज दिया। लेकिन आर्थिक मंदी झेल रहे ये देश इकोनॉमी पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं। इसी के साथ अब ये कर्ज चुकाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है। जिसका सीधा कई देशों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।

चीन ने दिया था कई बार कर्ज

जिन देशों पर चीन ने दया दिखाई और कर्ज दिया अब उन्हें वो माफ करने का विचार कर रहा है। चीन ने इन देशों को कर्ज स्कूल खुले रखने, खाना, बिजली, पीना और रेवेन्यू जेनेरेट करने के लिए दिया था। इसी के साथ कहा था कि आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बाद वो कर्ज ब्याज समेत लौटा देंगे। लेकिन पाकिस्तान, केन्या जैसे देश खुद नहीं उबर पाए हैं। वो कर्ज चुका सकें। ऐसे में चीन विचार कर रहा है कि वो अब कर्ज माफ कर दे।

पाकिस्तान को कर्ज चुकाने के लिए दिया समय

विदेशी मुद्रा भंडार में रुपए की कमी हो रही है। हाल में चीन ने पाकिस्तान को दो अरब डॉलर का कर्ज चुकाने के लिए और समय दिया है। पाकिस्तान में लोगों के पास खाने के लिए पैसा नहीं है जिससे वो कर्ज चुका सके। इसके बावजूद चीन पाकिस्तान की मदद के लिए कई बार आगे आया।

चीन ने इन देशों को 50 प्रतिशत तक विदेश कर्ज दिया है। जिसका भुगतान करने के लिए ये देश अपने रेवेन्यू की कुल पूंजी देने को तैयार थे। लेकिन आर्थिक मार झेल रहे देश में रेवेन्यू नहीं जेनेरेट हो पा रहा है। जिसकी वजह से वो डिफ़ॉल्ट घोषित होते जा रहे हैं। ज़ाम्बिया और श्रीलंका पहले लोन डिफ़ॉल्ट देश की लिस्ट में जा चुके हैं।

पाकिस्तान में हालात ठीक नहीं हैं। वहां लाखों टेक्सटाइल वर्कर्स को नौकरी से निकाल दिए गए है। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के ऐसा करने के पीछे बिजली की बचत करना है। केन्या में हजारों सिविल वर्कर्स को कई महीनों से सैलरी नहीं मिली है। केन्या सरकार के अनुसार, वो इन रुपए को विदेशी कर्ज चुकाने के लिए जमा कर रही है।

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