Sarvapitri Amavasya : सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों के तर्पण के लिए करें ये काम

 
Sarvapitri Amavasya :

इस बार 25 सितम्बर रविवार को सर्व पितृ अमावस्या है। अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करके उन्हें तर्पण-श्राद्ध से प्रसन्न करने के दिन ही हैं श्राद्धपक्ष माना गया है। जिस प्रकार चारागाह में सैंकड़ों गौओं में छिपी अपनी माँ को बछड़ा तलाश लेता है उसी प्रकार श्राद्धकर्म में दिए पदार्थ को मंत्र वहाँ पर पहुँचा देता हैं जहाँ लक्षित जीव अवस्थित रहता है। पितरों के नाम, गोत्र और मंत्र श्राद्ध में दिये गये अन्न को उसके पास ले जाने मदद करते हैं। चाहे वो सैंकड़ों योनियों में क्यों न गये हों। श्राद्ध के अन्नादि से पितरों की तृप्ति होती है। परमेष्ठी ब्रह्मा ने इसी प्रकार के श्राद्ध मर्यादा स्थिर की है।

सर्व पितृ अमावस्या को पितर भूमि पर आते हैं। उस दिन अवश्य श्राद्ध करना चहिये। उस दिन श्राद्ध नही करते हैं तो पितर नाराज होकर चले जाते हैं। यदि उस दिन श्राद्ध करने में सक्षम् नही तो उस दिन तांबे के लोटे में जल भरकर के भगवदगीता के सातवें अध्याय का पाठ कर सकते हैं और मंत्र  ॐ नमो भगवते वासुदेवए, ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधा देव्यै स्वाहा’ की 1-1 माला करके सूर्यनारायण को जल का अघ्र्य दें। सूर्य भगवान को बगल ऊँची करके बोले कि मैं अपने पितरों को प्रणाम करता हूँ। वो मेरी भक्ति से तृप्तिलाभ करें। मैंने अपनी दोनों बाहें आकाश में उठा रखी हैं। जिनका श्राद्ध किया जाये उनका स्मरण करके उन्हें याद दिलायें कि आप देह नहीं हो। आपकी देह तो समाप्त हो चुकी है, लेकिन आप विद्यमान हो। आप अगर आत्मा हो तो शाश्वत हो। चैतन्य हो। अपने शाश्वत स्वरूप को निहार कर हे पितृ आत्माओं ! आप परमात्ममय हो जाओ। हे पितरात्माओं! हे पुण्यात्माओं ! परमात्म-स्वभाव का स्मऱण करके जन्म मृत्यु के चक्र से सदा-सदा के लिए मुक्त हो जाओ। हे पितृ आत्माओ!

ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि जिनके पितर नाराज होते हैं। उनकी ग्रह दशा अच्छी हो तब भी उनके जीवन में हर पल परेशानी बनी रहती है। श्राद्ध पक्ष में सयंम-नियम पालन करें, नहीं तो पितर शाप भी दे सकते हैं। श्राद्ध पक्ष में गाय को गुड़ के साथ रोटी खिलाएं और कुत्ते, बिल्ली और कौओं को आहार दें। इससे पितरों का आशीर्वाद आप पर बना रहेगा।