Sankashti Ganesh Chaturthi: शनिवार को संकष्टी चतुर्थी को गणेश की करें ऐसे पूजा,खत्म होगी जीवन की सभी समस्या

 
Sankashti Ganesh Chaturthi

विघ्नों और मुसीबतें दूर करने के लिए आगामी 16 जुलाई 2022 शनिवार को संकष्ट चतुर्थी को पूजा करें। शिव पुराण में हैं कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन सुबह गणपति का पूजन करें और रात को चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें और ये मंत्र बोलें। ॐ गं गणपते नमः। ॐ सोमाय नमः। इससे भगवान गणेश प्रसन्न होंगे। 16 जुलाई 2022 शनिवार  को संक्रांति (पुण्यकाल : सूर्योदय से सूर्यास्त तक है) इसमें इसमें किया गया जप, ध्यान, दान व पुण्यकर्म का अक्षय फाल प्राप्त होता है। चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश भगवान हैं।

हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक महीने में दो चतुर्थी होती हैं। पहली पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी और अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता हैं। शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्ष के। पापक्षयकरी पक्ष भोग फलप्रदा अर्थात महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष पापों का नाश करने वाली होती है और एक पक्ष तक उत्तम भोग रूपी फल देने वाली मानी जातीहै।

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जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं जो कि मिटती नहीं हैं। कभी कोई कष्ट तो कभी कोई समस्या। ऐसे में शिवपुराण में बताया एक प्रयोग कर सकते हैं। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी) आती है। उस दिन सुबह छह मंत्र बोलते हुए गणपति को प्रणाम करें कि घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों।

छः मंत्र इस प्रकार हैं :–

ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे।
ॐ दुर्मुखाय नम: : भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो भैरव देख दुष्ट घबराये।
ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले, उनका सुमिरन करने वाले प्रसन्न हो जायें।
ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय यानी दूसरों को आनंदित करते हैं। भक्त प्रमोदी होता है जबकि अभक्त प्रमादी होता है, आलसी। आलसी आदमी लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है। जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है।
ॐ अविघ्नाय नम:
ॐ विघ्नकरत्र्येय नम: