Sunday, October 24, 2021
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कैसे करे नवरात्री पर नवमी पूजा? जाने महत्व और पूजा विधि

देश भर में दशहरे से एक दिन पहले महानवमी बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है जिसका लोगो के बीच एक अलग ही उत्साह होता है। महा नवमी नवरात्रि के नौवें दिन का प्रतीक है और यह आज के दिन 14 अक्टूबर दिन गुरुवार को पूरे देश में बहुत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आपको बता दे की भारत के कई राज्यों में आज का दिन दुर्गा पूजा का तीसरा दिन भी है और इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।

नवरात्रि के नौवे दिन माँ दुर्गा के नौवे सबसे शक्तिशाली रूप देवी सिद्धिदात्री को पूजा जाता है।  यह देवीय शक्ति का एक रूप है जिसे नव दुर्गा के अहम रूपों में माना जाता है।

कैसे करे नवरात्री पर नवमी पूजा?
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माँ दुर्गा के नौवे रूप देवी सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व

नवरात्रि के नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा के साथ संपन्न होती है। देवी अपने भक्तों को कई सिद्धियों का आशीर्वाद देने के लिए जानी जाती हैं और उन्हें चार भुजाओं के साथ गदा, चक्र, शंख और कमल के फूल के साथ चित्रित किया गया है। माँ के इस रूप की सवारी शेर है।

कहा जाता है कि सिद्धिदात्री के आशीर्वाद से भगवान शिव ने अपनी सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं और सच्चे मन से माँ के इस रूप की पूजा कर व्यक्ति अपने जीवन से कष्टों को दूर कर अपनी सभी इच्छाओ को पूर्ण कर सकता है।

कैसे करे नवरात्री पर नवमी पूजा?
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नवमी के दिन कैसे करे देवी सिद्धिदात्री की पूजा

देश के कई हिस्सों में कन्या पूजन अष्टमी से ही शुरू हो जाती है और कई लोग इसे नवमी को मनाते है जिसमे नौ छोटी कन्याओ, जिन्हें देवी दुर्गा के नौ रूपों के रूप में माना जाता है, की पूजा की जाती है और उन्हें घर बुलाकर प्रसाद का भोग लगाया जाता है। पूजा करने से पूर्व उनके पैर धोए जाते हैं और उन्हें नए कपड़े एवं अन्य चीज़ो का भेंट दिया जाता हैं।

कैसे करे नवरात्री पर नवमी पूजा?
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पूर्वी भारत में, दुर्गा पूजा उत्सव के तीसरे दिन, महा नवमी पर, भक्त स्नान करने के बाद सुबह जल्दी 16 चरणों वाली षोडशोपचार पूजा करते हैं। इस पूजा में मां दुर्गा का आह्वान करने के लिए ध्यान किया जाता है, और अन्य अनुष्ठानों में आसन नामक देवी दुर्गा को पांच फूल चढ़ाए जाते हैं।

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मां को पद्य प्रक्षालन, अर्घ्य समर्पण के साथ उनके पैर धोये जाते है। मंत्र जप, अचमन समर्पण, स्नान के लिए देवी दुर्गा को जल अर्पित किया जाता है, माँ को नए वस्त्र अर्पित करना होता है, अभूषण समर्पण, चंदन समर्पण, रोली समर्पण, कज्जलारपन, सौभाग्य सूत्र, सुगंधिता द्रव्य में सुगंध अर्पित करना, हरिद्रा समर्पण, अक्षत समर्पण, पुष्पांजलि, बिल्वपत्र, धूप समर्पण, दीप समर्पण, क्षमापन के साथ देवी की पूजा संपन्न की जाती है एवं उनसे लोग अपनी सभी गलतियों के लिए क्षमा भी मांगते है।

नवमी पूजा मुहूर्त 13 अक्टूबर को रात 8:07 बजे से शुरू होकर 14 अक्टूबर को शाम 6.52 बजे तक है। इस समय के दौरान आप देवी की पूजा कर नौ कन्याओ को खिला सकते है एवं अपने व्रत का समापन कर सकते है। 

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