Chaturdashi Shradh: चतुर्दशी तिथि पर अपमृत्यु से मृतक का श्राद्ध करने का विधान

 
Chaturdashi Shradh:

24 सितम्बर 2022 शनिवार को चतुर्दशी तिथि है। इस दिन आग,दुर्घटना, अस्त्र - शस्त्र,अपमृत्यु से मृतक का श्राद्ध करने का विधान है। हिंदू धर्म के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में परिजनों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करने का विधान है । महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया  कि इस तिथि पर केवल उन मृत परिजनों का श्राद्ध करना चाहिए, जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो। इस तिथि पर अकाल मृत्यु (हत्या, दुर्घटना, आत्महत्या आदि)  से मृत पितरों का श्राद्ध करने का  महत्व है। इस तिथि पर स्वाभाविक रूप से मृत परिजनों का श्राद्ध करने से श्राद्ध करने वाले को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

ऐसी स्थिति में उन परिजनों का श्राद्ध सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के दिन करना श्रेष्ठ है। महाभारत के अनुसार पर्व अनुसार पितरों की मृत्यु स्वाभाविक रुप से हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि पर करने से श्राद्धकर्ता विपत्ति में घिर जाता हैं। उन्हें शीघ्र लड़ाई में जाना पड़ता है। जवानी में उनके घर के सदस्यों की भी मृत्यु हो सकती है। चतुर्दशी श्राद्ध के संबंध में ऐसा वर्णन कूर्मपुराण में मिलता है कि चतुर्दशी को श्राद्ध करने से अयोग्य संतान होती है।याज्ञवल्क्यस्मृति के अनुसार चतुर्दशी तिथि को श्राद्ध नहीं करना चाहिए। इस दिन श्राद्ध करने वाला विपत्ति में फस सकता है। जिन पितरों की अकाल मृत्यु हुई हो व उनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं हो, ऐसे मृत लोगों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को करने से वे प्रसन्न होते हैं।