बच्चों की सेहत का ख्याल पैरेंट्स को खुद से ज्यादा होना चाहिये, क्योंकि बच्चे कई बार चीजों को बता और जता नहीं पाते हैं। ऐसे में आपको खुद से उनकी समझना पड़ता है, बात करें अगर इन दिनों बच्चों की आम समस्याओं के बारें में तो एंग्जायटी के लक्षण दुनिया के हर पांचवें बच्चे में पाये जा रहें हैं। वहीं इसकी शुरुआती दौर को समझने में पैरेंट गलती कर देते हैं, ऐसे में बच्चों को मानसिक समस्या से बहुत जूझना पड़ सकता है। इसके साथ ही अगर इसके लक्षणों में ध्यान दिया जाये तो बच्चों को आप इससे जल्द ही निजात दिला सकते हैं।
काम को मना कर रहें हैं बच्चे तो समझे उनकी बात-
जब कभी बच्चों के पास समस्या बताने का कोई जरिया नहीं होता है तो वह रिएक्ट करने लगते हैं, वहीं इसके कुछ कारण होते हैं। जिनमें से नींद न आना, खाना खाने में दिक्कत, बिस्तर गीला रहना आदि शामिल हो सकते हैं। दूसरी तरफ अगर बच्चे को समस्या है तो वह रोज के कामों को भी मना करने लगते हैं, साथ ही आपसे चिपक करके रहते हैं।
पूछने के तरीके में करें बदलाव-
बच्चों को यकायक कई समस्याएं हो जाती है, जिसमें वह लोगों के बीच बोलने, लोंगो के बीच खाना खाने, लोंगो के बोलने से मना कर देना या बहुत धीमी आवाज में बोलना जैसा प्रदर्शित करते हैं। ऐसे में बच्चों से आप सीधे तौर पर न पूछे कि घबराहट हो रही है क्या, वहीं उनसे इस दौरान पूछे कि कैसा लग रहा है, ऐसे में बच्चे सहज होकर जवाब दे पायेंगे।

