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जान जोखिम में थी इसलिये छिपा रहाः दीप सिद्धू


जान जोखिम में थी इसलिये छिपा रहाः दीप सिद्धू

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के लाल किला पर हुई हिंसा का आरोपी है दीप सिद्धू
पुलिस हिरासत में दीप सिद्धू ने कहा, किसान नेताओं ने सारा दोष उस पर मढ़ा

न्यूज डेस्क गणतंत्र दिवस पर लालकिला पर हुई हिंसा के आरोपी दीप सिद्धू ने कहा है कि किसान नेताओं ने हिंसा का सारा दोष उसके सिर पर मढ़ दिया था। उसे डर था कि उसे मार दिया जायेगा इसलिये वह इतने दिनों तक छिपा रहा। हालांकि पुलिस का कहना है कि उसके दीप सिद्धू के आरोपों का सत्यापन किया जायेगा। वहीं किसान नेताओं ने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से इंकार किया है।

कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के दौरान गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में जबरदस्त हिंसा हुई। इसी दौरान लालकिले पर उपद्रवियों ने धार्मिक झंडा फहरा दिया था। इस मामले में पंजाबी अभिनेता और समाजिक कार्यकर्ता दीप सिद्धू को आरोपी बनाते हुए दिल्ली पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। दीप सिद्धू को दिल्ली पुलिस ने करनाल बाइपास से गिरफ्तार कर लिया था। मंगलवार को अदालत ने सिद्धू को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था जहां उससे पूछताछ की जा रही है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार दीप सिद्धू ने इतने दिनों तक छिपे रहने की वजह उसकी जान का खतरा बताया है। बकौल दिल्ली पुलिस, दीप सिद्धू ने कहा है कि गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा का सारा दोष किसान नेताओं ने उसके सिर मढ़ दिया था। जिससे उसकी जान खतरे में थी। उसे डर था कि उसे मार दिया जायेगा इसलिये वह छिप कर रह रहा था।

सिद्धू ने किसान नेताओं पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुुए यह भी कहा कि गणतंत्र दिवस की रैली से 15 दिन पहले से ही पंजाब में और सिंधु बार्डर पर किसान नेता अपने संबोधन में किसानों से कह रहे थे कि वे नई दिल्ली, संसद, इंडिया गेट और लाल किले के लिए अपनी ट्रैक्टर रैली निकालेंगे। दीप सिद्धू ने कहा कि उसका कोई बुरा इरादा नहीं था और जैसे सभी वहां जा रहे थे तो वह भी चला गया था। दीप सिद्धू का कहना है कि जब वह 26 जनवरी को जगा तो उसके मोबाइल फोन पर लोगों के लालकिले की ओर बढ़ने के बारे में तीन मिस्ड काॅल और संदेश थे, तो वह भी अपने तीन दोस्तों के साथ वहां पहुंच गया।

हालांकि दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया है की दीप सिद्धू द्वारा लगाये गये आरोपों और किये गये खुलासों की जांच की जायेगी। यदि आरोप और खुुलासे सत्य पाये गये तो आगे की रणनीति निर्धारित की जायेगी। वहीं किसान संगठनों की ओर से दीप सिद्धू के बयानों को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गयी हैै। किसाना नेताओं का कहना है कि वह पहले दीप सिद्धू के बयानों को देखेंगे-सुनेंगे इसके बाद ही अपना बयान जारी करेंगे।

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