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खतरे में जान – कोरोना की जांचों पर मंडराया संकट


खतरे में जान – कोरोना की जांचों पर मंडराया संकट

लैब में हजारों सैंपल पेंडिंग, मरीज़ हलकान, स्थिति बेकाबू

अमित बिश्‍नोई

मेरठ। कोरोना वायरस की दूसरी वेव जितनी तेजी से अपना जाल बुन रही है, उतनी ही तेज़ी से स्वास्थ्य सेवाओं के वजूद की पोल भी खुल रही है। वायरस को आए साल भर से ज़्यादा बीत चुका है लेकिन इंतज़ाम जस के तस हैं। स्थिति ये है कि जांच करने वाली लैब अब ख़ुद ओवरलोड हो गयी हैं जबकि एंटीजन रैपिड टेस्ट किट भी ख़त्म होने के करीब हैं। ऐसे में न केवल मरीजों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं बल्कि लचर और अव्यवस्थाओं के बीच संक्रमण भी कई गुना तेज़ी से फैल सकता है।

रिपोर्ट में देरी, मुश्किल में जान
जांच सिस्टम ओवरलोड होने का सीधा असर कोरोना संक्रमण की चेन मजबूती पर पड़ रहा है। टेस्टिंग में देरी की वजह से मरीजों को समय रहते इलाज़ नहीं मिल पा रहा है। लैब से रिपोर्ट आने में ही तीन से पांच दिन लग जा रहे हैं. इससे मरीजों के हालात और बिगड़ जा रहे हैं।

माइक्रोबॉयलाजी लैब में हर दिन डेढ से दो हजार सैंपल पेंडिंग में चल रहे हैं. रिपोर्ट के इंतजार में मरीज न तो अपना पूरा इलाज शुरू करवा पा रहे हैं और न ही उन्हें वक़्त रहते आईसोलेशन मिल पा रहा है. जिसकी वजह से लोगों की जान पर बन आ रही है। एक्सपट्र्स का भी कहना है कि कोरोना संक्रमण को तुरंत इलाज मिलना जरूरी है. वायरस 24 घंटे में फेफड़ों में जबरदस्त संक्रमण पैदा कर दे रहा है.

क्षमता से ज्यादा जांच रहे सैम्पल

बढ़ते मरीजों और उनके कांटेक्ट्स की लंबी लिस्ट होने की वजह से माइक्रोबॉयलाजी लैब भी पस्त होने लगी है। मेरठ मेडिकल कॉलेज लैब में 24 घंटे शिफ्टों में काम चल रहा है. लैब के एचओडी डा. अमित गर्ग का कहना है कि चार जिलों के सैंपल टेस्टिंग एक लैब में हो रही है। तीन मशीन हैं और 12 लोगों का स्टॉफ 24 घंटे काम कर रहा है। एक मशीन से एक बार में 96 सैंपल जांच होते हैं. इसमें भी करीब 2 घंटे लगते है. लैब की क्षमता 5 से 6 हजार सैंपल्स की हैं जबकि 8 हजार तक सैंपल जांच किए जा रहे हैं. लैब में लगभग दो हजार तक सैंपल पेंडिंग हो रहे हैं. वहीं एंटीजन रैपिड टेस्ट किट की भी विभाग में शॉर्टेज होने लगी है।


ये है जरूरी

इन नियमों का पालन जरूरी

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