World Tiger Day 2022: लगातार बढ़ रही बाघों की संख्या,बदल रहा जंगल के शहनशाह का मिजाज

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रामनगर। कॉर्बेट नेशनल पार्क की बाघों के चलते अलग पहचान बनी है। यहां पर बाघों का बेहतर संरक्षण का नतीजा है कि बाघों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। 2018 में गणना के मुताबिक उत्तराखंड में 442 बाघ रिकॉर्ड किए गए थे। जिनमें 325 बाघ कॉर्बेट लैंडस्केप में थे। चार साल बाद फिर एनटीसीए की गणना हुई। जिसकी रिपोर्ट बाघ दिवस पर साझा की जाएगी। उम्मीद है कि इसमें बाघों की संख्या में वृद्धि होगी। हालांकि बाघों की संख्या में वृद्धि होने के साथ वन विभाग की चुनौतियां बढ़ रही हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

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अमूमन बाघ इलाका बांटकर रहते हैं। कुछ सालों से प्रदेश में बाघों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है। कॉर्बेट के सर्पदुली, रामनगर वन प्रभाग कोसी रेंज और अल्मोड़ा वन प्रभाग मोहान रेंज के बफर जोन में एक बाघिन और तीन बाघ देखे हैं। जो एक साथ शिकार करते हैं। जबकि विशेषज्ञों की माने तो दो साल की उम्र से बाघ अलग हो जाते हैं। बाघों के बदले व्यवहार ने विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया। अध्ययन की माने तो एक बाघ का इलाका कम से कम 20 किमी तक होता है लेकिन रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज और कॉर्बेट में बाघों के आसपास रहने के मामले चौंकाते हैं। इससे खतरा बढ़ रहा है। कॉर्बेट के वरिष्ठ वन्यजीव वैज्ञानिक शाह बिलाल के मुताबिक बफर जोन के क्षेत्रों में देखा गया है कि बाघ आसान शिकार ढूंढ लेते हैं। इस जोन में बाघ आसानी से गाय, भैंस का शिकार कर रहे हैं। ऐसे में एक साथ चार बाघों की मौजूदगी काफी चौंकाने वाली है। किसी क्षेत्र में बाघों का बढ़ना एक अच्छा संकेत है लेकिन यह चिंता का विषय बनता है। क्योंकि नर बाघों का वन क्षेत्र सीमित है।

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