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लखीसराय के अशोक धाम में भगदड़, 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत; करंट की अफवाह से मची अफरा-तफरी

Dham in Lakhisarai

बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोक धाम (इन्द्र दमनेश्वर महादेव मंदिर) में सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर के पास भगदड़ मचने से 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।

सावन का तीसरा सोमवार होने के कारण अशोक धाम में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान सुबह करीब 6:45 बजे अचानक भगदड़ मच गई।

कैसे हुआ हादसा?

जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार के मुताबिक, अशोक धाम हाल्ट पर एक ही समय में दोनों तरफ से ट्रेनें आ गई थीं। ट्रेन को देखकर कुछ युवकों ने अचानक भागना शुरू कर दिया। इस भाग-दौड़ के दौरान वहां मौजूद बिजली का एक पोल नीचे गिर गया।

पोल गिरते ही लोगों के बीच अफवाह फैल गई कि वहां करंट आ गया है। इससे श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। भगदड़ के दौरान कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए।

अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय बिजली की सप्लाई बंद थी और तार भी कवर किया हुआ था। इसके बावजूद करंट फैलने की अफवाह के कारण स्थिति बिगड़ गई।

7 महिलाओं की मौत, 14 लोग घायल

हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 14 लोग घायल हुए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे।

स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

प्रशासन ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जताया दुख

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर दुख जताते हुए इसे बेहद दुखद और हृदयविदारक बताया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को घायलों के जल्द और उचित इलाज के निर्देश दिए।

उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की।

प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है अशोक धाम

अशोक धाम लखीसराय जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित है। यह मंदिर क्षेत्र में आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र है।

यह धार्मिक स्थल अपने विशाल शिवलिंग और भव्य मंदिर परिसर के लिए जाना जाता है। बताया जाता है कि यहां 1977 में पालकालीन विशाल शिवलिंग मिला था। इसके बाद से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा के लिए आते हैं।

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