सीएम रावत ने कहा, गंगा जल के बिना जीवन का विचार ही निरर्थक
हरिद्वार तक गंगा को पूरी तरह से साफ रखने का लिया संकल्प
देहरादून। कुंभ 2021 में आने वाले श्रद्धालुओं को पापनाशनी मां गंगा के जल में स्वच्छता का अहसास भी होगा। उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले से पहले हरिद्वार तक गंगा को पूरी तरह से साफ रखने का संकल्प लिया है। शनिवार को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, गंगा नदी घाटी प्रबंधन और अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित वर्चुअल सम्मेलन को संबोधित करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत ने कहा कि कुंभ मेले में लोग स्वच्छ गंगा में स्नान करके जा सकेंगे।
वर्चुअल सम्मेलन में ख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा, गंगा जल के बिना जीवन का विचार ही निरर्थक है। राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि हरिद्वार तक गंगा को पूरी तरह से साफ रखा जायेगा। गंगा भारत की संस्कृति भी है और इसको निर्मल और स्वच्छ रखने के लिये हमें गंगा में मिलने वाली तमाम सहायक नदियों का भी ध्यान रखना होगा। सीएम ने कहा कि गंगा की स्वच्छता को लेकर किये गये शोध में ऋषिकेश तक गंगाजल पीने के लायक तथा हरिद्वार में स्नान करने के लिए उपयुक्त पाया गया है। देश की 40 प्रतिशत से ज्यादा आबादी को लाभ पहुंचाने वाली गंगा नदी अर्थव्यवस्था की संवाहक भी है। उत्तराखंड में जल संचय एवं जल संरक्षण योजनाओं के प्रति विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वर्चुअल सम्मेलन में अपने विचार रखते हुए केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि गंगा से प्रकृति, पर्यटन एवं ऊर्जा संस्कृति भी जुड़ी है। गंगा नदी ही नहीं बल्कि हमारी आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। गंगा के प्रदूषण को दूर करने से ही हम अपने सांस्कृतिक जीवन मूल्यों के प्रदूषण को कम करने में सफल हो सकेंगे।
वर्चुअल सम्मेलन में महानिदेशक टेरी डा. अजय माथुर, महानिदेशक नमामि गंगे राजीव रंजन मिश्रा, सी गंगा के फाउडिंग हेड प्रो. विनोद तारे, अपर सचिव राम विलास यादव ने भी अपने विचार रखते हुए गंगा को स्वच्छ रखने की प्रतिबद्धता जताई।
24 घंटे पेयजल देगा, 100 करोड़ की बिजली बचायेगा सौंग बांध
देहरादून में बनाये जा रहे 3.5 किमी लंबे सौंग बांध को लेकर सीएम त्रिवेंद सिंह रावत ने कहा कि सौंग बांध के बन जाने के बाद अगले 60 वर्षो तक देहरादून को 24 घंटें पेयजल मिल सकेगा। सौंग बांध से 100 करोड़ रूपये की विद्युत बचत की जा सकेगी। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड के चैतरफा विकास के लिये गैरसैंण, पिथौरागढ़ आदि क्षेत्रों में इस प्रकार की झीलों का निर्माण एवं सुधारीकरण का कार्य किया जाएगा।

