वाशिंगटन। अमेरिकन अंतरिक्ष एजेंसी नासा फिर से चांद पर मनुष्य को भेजने की तैयारी में जुट गया है। आर्टेमिस-1 मिशन के तहत अब आगामी 29 अगस्त को नासा की पहली उड़ान खुलेगी। जानकारी के अनुसार अगर सब कुछ सही रहता है तो 2025 में मनुष्य को चांद पर फिर से ले जाने के लक्ष्य के साथ आर्टेमिस प्रोजेक्ट पटरी पर आ जाएगा। आर्टेमिस-1 मिशन में नासा की ओर से नया और सुपर हैवी रॉकेट को प्रयोग किया जाएगा। इसमें स्पेस लॉंच सिस्टम लगाया है। जिसे पहले कभी उपयोग नहीं किया गया। अपोलो मिशन के कमांड सर्विस मॉडयूल के उलट ओरियन एमपीसीवी सौर-संचालित प्रणाली लगी हैं। इसमें लगी विशिष्ट एक्स-विंग शैली की सौर सरणियों को मिशन के दौरान शटल पर दबाव कम करने के लिए आगे पीछे घुमाया जा सकेगा। यह छह अंतरिक्ष यात्रियों को 21 दिनों तक के लिए अंतरिक्ष में ले जाने के लिए सक्षम है। बिना चालक दल के आर्टेमिस 1 मिशन 42 दिनों तक भी चल सकता है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अपोलो मिशन के उलट आर्टेमिस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट है। एमपीसीवी में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए अमेरिका में बना कैप्सूल, ईंधन, पानी, हवा जैसी मुख्य चीजों की आपूर्ति को यूरोप में बना सर्विस मॉडयूल शामिल किया गया है। ऊर्जा के लिए सूरज पर निर्भरता को लेकर आर्टेमिस के लांच समय पर कुछ चीजों का ध्यान रखा गया है। क्योंकि, उस समय पृथ्वी और चांद की स्थिति ऐसी होनी चाहिए कि उड़ान के दौरान किसी भी एक बिंदु पर स्पेस शटल सूर्य से 90 मिनट से अधिक तक छाया में ना रहे।
एसएलएस यान ओरियन को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने का काम करेगा। वहीं इसके मूल चरण को छोड़ दिया जाएगा और उसे समुद्र में गिराया जाएगा। चांद के लिए स्पेस शटल को उड़ाने के लिए जरूरी ऊर्जा का उपयोग उड़ान के पहले चरण में किया जाता है। इसके बाद ओरियन को पृथ्वी कक्षा के बाहर धकेला जाएगा। एसएलएस के दूसरे चरण के माध्यम से चंद्रमा पर धकेल दिया जाएगा। इसके बाद ओरियन, आईसीपीएस से अलग हो जाएगा और अगले कुछ दिन चांद पर बिताएगा।
