आखिर होली खेलने से स्वास्थ्य को कैसे फायदा हो सकता है? यहां हम आपको ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं
यह त्योहार ऐसे मौसम में होता है जब पर्यावरण में कई तरह के बैक्टीरिया तेजी से बढ़ रहे होते हैं। होली के एक दिन पहले होने वाले होलिका दहन में इसके आसपास चलने की परंपरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करने और जगह-जगह होलिका जलाने से वातावरण के साथ शरीर पर मौजूद बैक्टीरिया मर जाते हैं।
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होली के जीवंत रंगों में डूबा हुआ हमारा मन और शरीर इससे असंख्य प्रकार के लाभ का अनुभव करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लाल और चमकीले रंग दिल की धड़कन और श्वास को उत्तेजित करते हैं। वहीं पीले और नीले रंग न सिर्फ हमें खुशी का अनुभव कराते हैं साथ ही यह हमारी इंद्रियों को भी शांत करने में सहायक हैं।
होली को इसके ठंडे और शीतल पेय पदार्थों के रूप में जाना जाता है। ठंडाई और कांजी जैसे प्रसिद्ध होली पेय न केवल शरीर और दिमाग को शीतलता देते हैं साथ ही इन्हें एंटी-ऑक्सीडेंट का एक उत्कृष्ट स्रोत भी माना जाता है।
पारंपरिक रूप से होली के रंगों को हिबिस्कस के फूल, मेंहदी के पत्ते, केसर, चंदन आदि के मिश्रण से बनाया जाता है। ये प्राकृतिक रंग न केवल आपकी त्वचा, बालों और आँखों के लिए अच्छे हैं साथ ही ये मृत त्वचा को भी साफ़ करने में भी सहायक हैं। त्वचा की रंगत सुधारने के लिए इन औषधियों का आयुर्वेद में जिक्र मिलता है।

