Vishal Bhardwaj Birthday : जानिए विशाल भरद्वाज से जुड़े कुछ अनसुने किस्से

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विशाल भारद्वाज भारतीय फ़िल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, निर्माता, संगीतकार और पार्श्व गायक है आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्होंने एक, दो या तीन नहीं बल्कि आठ राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते हैं। विशाल भले ही सफल हों, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनकी जिंदगी अलग थी। उत्तर प्रदेश के बिजनौर के चांदपुर शहर में जन्मे विशाल क्रिकेट की दुनिया में कमाल करना चाहते थे, लेकिन वक्त और हालात ने ऐसी किस्मत बदली कि सब कुछ बदल गया। फिर भी विशाल ने हिम्मत नहीं हारी और बॉलीवुड की दुनिया में खूब नाम कमाया। आज (4 अगस्त) वह अपना 57वां जन्मदिन मना रहे हैं। आइए इस खास मौके पर जानते हैं उनके बारे में कुछ अनसुनी बातें।

पिता की मौत के बाद नहीं बन सके क्रिकेटर

आपको बता दे कि विशाल भारद्वाज मेरठ में स्टेट अंडर-19 टीम के लिए क्रिकेट खेलते थे. जिस साल उन्हें इंटर-यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में भाग लेना था, एक अभ्यास मैच के दौरान उनका अंगूठा टूट गया। इस वजह से वह उस साल नहीं खेल सके. इसी साल जिंदगी ने उन्हें एक और बड़ा झटका दिया. उनके पिता का निधन हो गया. इस वजह से वह क्रिकेट में अपना सफर आगे नहीं बढ़ा सके.

दिल का दौरा पड़ने से भाई की भी जान चली गई

विशाल की जिंदगी में अभी और भी दुख बाकी थे. उनके बड़े भाई, जो फिल्म निर्माता बनने के लिए कई वर्षों तक मुंबई में संघर्ष कर रहे थे, की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई।

17 साल की उम्र में बनाया गाना

विशाल ने 17 साल की उम्र में एक गाना बनाया था। जिसे सुनने के बाद उनके पिता ने म्यूजिक डायरेक्टर उषा खन्ना से चर्चा की. उन्होंने साल 1985 में फिल्म ‘यार कसम’ में इसका इस्तेमाल किया था.

रेखा से मुलाकात हुई

फिर विशाल दिल्ली चले गए . जहां कॉलेज के वार्षिक समारोह में उनकी मुलाकात रेखा भारद्वाज से हुई। वह उनसे सीनियर थीं, लेकिन दोनों में प्यार हो गया और बाद में दोनों ने शादी कर ली। आप शायद ही जानते होंगे कि विशाल एक टेनिस खिलाड़ी भी हैं।

पहली नौकरी मिली

विशाल ने उन दोस्तों के लिए हारमोनियम बजाना शुरू किया जो ग़ज़ल गायक थे। कुछ साल बाद उन्हें पहली नौकरी मिली. दिल्ली की एक म्यूजिक कंपनी में. इसके बाद वह संगीतकार बनने के लिए मुंबई चले गये। लेकिन संगीत रचना का मौका पाने के लिए वह फिल्मों के निर्देशन में चले गये। पल्प फिक्शन और डेकलॉग देखने के बाद उन्हें निर्देशन में हाथ आजमाने की इच्छा महसूस हुई। साल 1995 में ‘अभय’ में संगीत देने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और उनका कारवां आगे बढ़ता गया।

ये फिल्में बनाईं

विशाल ने ‘मकड़ी’, ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’, ‘हैदर’, ‘7 खून माफ’, ‘कमीने’ और ‘मटरू की बिजली का मंडोला’ जैसी कई फिल्में बनाई हैं। उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण भी किया है.

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