जानिए उज्जैन के महाकाल के बारे में कुछ रोचक बातें

धर्मजानिए उज्जैन के महाकाल के बारे में कुछ रोचक बातें

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देशभर में सावन के महीने में हर तरफ बम भोले की मस्ती चढ़ी रहती है । हर तरफ बाबा के जयकारे ही सुनाई देते हैं. वही माना ये जाता है जो व्यक्ति सावन के महीने में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में बाबा के दर्शन करता है उसको बाबा का विशेष आशिर्वाद मिलता है और ये उस व्यक्ति के लिए बड़ी सौभाग्य की बात होती है।

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर के बारे में कौन नहीं जानता। इस मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि दक्षिणमुखी मृत्युंजय श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होकर ब्रह्मांड का संचार करते हैं।

तीर्थ भूमि उज्जैन मध्य प्रदेश के मध्य में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि उज्जैन पांच हजार साल पुराना शहर है। इसे अवंती, अवंतिका, उज्जयिनी, विशाला, नंदिनी आदि नामों से भी जाना जाता है।

महाकालेश्वर स्वयंभू हैं

शिवपुराण की एक कथा के अनुसार उज्जयिनी के निवासी दूषण नामक राक्षस के अत्याचार से बहुत परेशान थे। तब उन लोगों ने भगवान शिव से प्रार्थना की, तब भगवान शिव ज्योति के रूप में प्रकट हुए और राक्षस का वध किया । इसके बाद उज्जयिनी में बसे उनके भक्तों के अनुरोध पर वे यहा लिंग के रूप में प्रतिष्ठित हो गए थे।

इसे मृत्युंजय महाकालेश्वर क्यों कहा जाता है?

श्रीमहाकालेश्वर पृथ्वी के राजा हैं। सभी ज्योतिर्लिंगों में से यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जिनको संपूर्ण पृथ्वी के राजा और मृत्यु के देवता के रूप में पूजा जाता है ।

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कितना पुराना है?

पुराणों के अनुसार श्री महाकाल को सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। शिवपुराण के अनुसार, श्रीकृष्ण के पालक नंद से आठ पीढ़ी पहले से महाकाल यहां निवास करते है। आपको बता दे कि इस ज्योतिर्लिंग की चर्चा पुराणों में भी पढने को मिलती है ।

भक्तों को अलग-अलग रूपों में होते है महाकाल के दर्शन

उज्जैन में विराजमान तो एक ही महाकाल हैं, लेकिन वे अपने भक्तों को अलग-अलग रूपों में दर्शन देते हैं। इन्हें हर साल और त्योहार के हिसाब से सजाया जाता है। जैसे वे शिवरात्रि में दूल्हा बनते है, वैसे ही श्रावण मास में राजा बनते है। दिवाली में जहां महाकाल का आंगन दीपों से सजाया जाता है, वहीं होली में गुलाल से रंगा जाता है. जहां ग्रीष्म ऋतु में घड़ों से जल महाकाल के सिर पर गिरता है तो वहीं कार्तिक माह में भगवान विष्णु को सृष्टि का कार्यभार सौंपने के लिए पालकी में विराजमान हो जाते हैं। महाकाल के हर रूप को देखकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो जाता है।

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