माथे पर तिलक लगाना हिंदू धर्म की परंपराओं में से एक है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत माथे पर तिलक लगाकर की जाती है। तिलक का अर्थ है किसी भी शुभ कार्य से पहले माथे पर लगाया जाने वाला निशान। तिलक दोनों भौंहों के बीच लगाया जाता है, जहां आज्ञाचक्र (छठा मूल चक्र) स्थित होता है। इसे चेतना केन्द्र भी कहा जाता है। सही तिलक लगाने से ग्रहों की स्थिति भी मजबूत होती है। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि तिलक लगाने से आप कुंडली में ग्रहों की स्थिति को भी ठीक कर सकते हैं और इसके दुष्प्रभावों से भी बच सकते हैं। आइए जानते हैं कौन सा तिलक किस ग्रह को मजबूत करता है।
इसका तिलक लगाने से सूर्य शुभ प्रभाव देता है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माथे पर अनामिका यानी छोटी उंगली के पास वाली उंगली से लाल चंदन का तिलक लगाने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और इसके अशुभ प्रभाव कम होते हैं। अनामिका उंगली से लाल चंदन लगाने से मान-सम्मान बढ़ता है और नौकरी व व्यवसाय में उन्नति के योग बनते हैं।
इसका तिलक लगाने से चंद्रमा शुभ प्रभाव देता है
सफेद चंदन को कनिष्ठा उंगली यानि छोटी उंगली से माथे पर लगाने से मन के कारक ग्रह चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। यह एक विशेष प्रयोग है क्योंकि आमतौर पर छोटी उंगली से तिलक नहीं लगाया जाता है। लेकिन जब कुंडली में चंद्रमा की स्थिति कमजोर हो तो सफेद चंदन को छोटी उंगली से लगाने से लाभ मिलता है। ऐसा करने से कई प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं और मन-मस्तिष्क पर शुभ प्रभाव पड़ता है।
इसका तिलक लगाने से शुभ प्रभाव मिलता है
माथे पर अनामिका यानी छोटी उंगली के पास वाली उंगली से नारंगी सिन्दूर का तिलक लगाने से कुंडली में ग्रहों के सेनापति मंगल की स्थिति मजबूत होती है। मांगलिक व्यक्ति को प्रतिदिन नारंगी सिन्दूर का तिलक लगाना चाहिए। ऐसा करने से मंगल के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
इसका तिलक लगाने से बुध ग्रह शुभ प्रभाव देता है
अष्टगंध का तिलक माथे पर कनिष्ठिका यानी छोटी उंगली से लगाने से कुंडली में ग्रहों के राजकुमार बुध की स्थिति मजबूत होती है। साथ ही बुध का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध तीव्र बुद्धि, संचार कौशल, बुद्धिमत्ता, स्मृति, सीखने की क्षमता, संचार कौशल आदि का कारक ग्रह है और बुध के शुभ प्रभाव से इनकी क्षमता में वृद्धि होती है।
इसका तिलक लगाने से गुरु शुभ प्रभाव देता है
प्रतिदिन माथे पर तर्जनी यानी अंगूठे के पास वाली उंगली से केसर का तिलक लगाने से कुंडली में बृहस्पति ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। कुंडली में बृहस्पति की शुभ स्थिति से आर्थिक समृद्धि, भाग्योदय, हर क्षेत्र में सफलता, शारीरिक और मानसिक सुख सहित कई गुण स्वाभाविक रूप से प्राप्त होते हैं।
इसका तिलक लगाने से शुक्र ग्रह शुभ प्रभाव देता है
प्रतिदिन अनामिका यानि छोटी उंगली के पास वाली उंगली से माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाने से भौतिक सुखों के स्वामी शुक्र की स्थिति मजबूत होती है। ऐसा करने से शुक्र ग्रह शुभ प्रभाव देता है और जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है। कुंडली में शुक्र की स्थिति मजबूत होने से भौतिक सुख, वैभव, विलासिता, आराम और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
इसका तिलक लगाने से शनि शुभ प्रभाव देते हैं
तीन उंगलियों से कंडे या अगरबत्ती का त्रिपुंड तिलक लगाने से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में मंगल शुभ रहता है। साथ ही इसे कोई भी बुरी आत्मा और नकारात्मक शक्ति छू नहीं पाती और शिव की कृपा से हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है और अखंड सौभाग्य का वास होता है।
