भले ही खो खो खेल हर जगह नहीं खेला जाता, फिर भी इसे खेलने या देखने में बहुत मज़ा आता है। यह खेल अधिकतर भारत में खेला जाता है, जहां से यह मूल रूप से आया था। इस खेल का जन्म दाता भारत हैं इसकी शुरुआत भारत में हुई और ज्यादातर यहीं खेला जाता है। भविष्य में, अधिक से अधिक देश इस गेम को खेलना शुरू कर सकते हैं। आप स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों को यह गेम खेलते हुए देख सकते हैं। अगर आपको यह गेम पसंद है और आप इसके बारे में और अधिक जानना चाहते हैं, तो यह पूरा आर्टिकल पढ़ें और आपको सब कुछ पता चल जाएगा।
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खो खो में कितने खिलाड़ी होते हैं? | How many players are there in Kho Kho?
दोस्तो! क्या आप जानते हैं खो खो में कितने खिलाड़ी होते हैं? वैसे तो खो खो में कुल 12 खिलाड़ी होते हैं। लेकिन उनमें से केवल 9 ही वास्तव में मैदान पर खेलते हैं। बाकी 3 खिलाड़ी विकल्प की तरह हैं। अगर 9 खिलाड़ियों में से कोई चोटिल हो जाए या नहीं खेल पाए तो उन्हें खेलने का मौका मिलता है।
खो-खो का इतिहास | History of Kho-Kho
खो खो खेल का जन्म दाता भारत हैं। यह सबसे पहले पुणे में खेला गया था यानि इसकी शुरुआत वहीं से हुई थी। खो शब्द संस्कृत के शू (Syu) से लिया गया हैं जिसका मतलब है खड़े हो जाओ
- खो-खो खेल प्रतियोगिता पहली बार 1914 में शुरू हुई।
- खो खो खेल सिर्फ भारत में ही नहीं खेला जाता, यह 1982 के ओलंपिक का भी हिस्सा था।
- 1961 में महिलाओं को भी खो खो खेल में सामिल कर दिया गया।
- भारतीय खो-खो फाउंडेशन की शुरुआत (गठन) 1961 में हुई थी|
खो-खो खेल के नियम है। | Kho Kho game rules
दोस्तो, अब, हम खो खो खेल के नियमों के बारे में जानने जा रहे हैं।
हम स्टेप वाइस खो-खो खेल खेलने के नियम सीखेंगे। जिससे हमें समझने में आसान होगी । तो चलिए खेल के नियमों से शुरुआत करते हैं।
- खो खो खेल में 12 खिलाड़ी होते हैं. लेकिन उनमें से केवल 9 ही मैदान पर खेलते हैं जबकि अन्य 3 खिलाड़ी टीम का हिस्सा होते हैं लेकिन उन्हें तुरंत खेलने का मौका नहीं मिलता है। उन्हें खेलने का मौका तभी मिलता है जब उनमें से किसी एक खिलाड़ी को चोट लग जाती है या कोई ऐसा खिलाड़ी होता है जिसे उनकी जगह लेने की जरूरत होती है।
- मैच टॉस के साथ शुरू होता है, और जो टीम जीतती है उसे चुनना होता है कि वह पहले लेजर बनना चाहती है या रूर।
- यदि खेल के दौरान किसी को चोट लग जाती है, तो उसकी जगह लेने के लिए जो 3 एक्स्ट्रा प्लेयर्स थे उनको लाया जाता है।
- यदि आप दूसरी टीम के खिलाड़ी को रन आउट कर देते हैं, तो आपकी टीम एक अंक जीत जाएगी।
- हर एक मैच में 4 पारी होती हैं। जिनमे 2 पारी छूने की होती हैं। और बाकी 2 पारियां दौड़ने की होती हैं।
- यदि आप बैठे हैं तो बिना खो लिए उठकर भाग नहीं सकते।
- जब किसी खिलाड़ी को खो मिल जाता है तो वह उठकर भागता है और उसकी जगह खो देने के लिए भागने लगता है।
- खेल में, प्रत्येक टीम को दो राउंड खेलने को मिलते हैं जो 95 मिनट तक चलते हैं।
- जो टीम पकड़ने की कोशिश करने वाली होती है वे फील्ड के रेखाओं पे बैठती है, वे ऐसी स्थिति में बैठते हैं ताकि भागने वाली टीम को परेशानी ना हो।
- जब दोनों टीमें अपनी बारी खेल चुकी होती हैं, तो जिस टीम के अधिक अंक होते हैं, वही जीतती है।
खो-खो खेल की प्रमुख प्रतियोगिताएं | Major competitions of Kho-Kho game
- राष्ट्रीय खो-खो चैम्पियनशिप | National Kho-Kho Championship
- फेडरेशन कप | Federation Cup
- इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप | Inter University Championship
- नेहरू गोल्ड कप | Nehru Gold Cup
खो-खो कैसे खेला जाता है? | How is Kho-Kho played?
खो खो दो टीमों द्वारा खेला जाने वाला खेल है। खिलाड़ी अपने सामान्य स्थान पर एक दूसरे के विपरीत बैठते हैं। खो खो में कुल 12 खिलाड़ी होते है, जिनमें 9 मैदान पर खेल रहे होते है और 3 एक्स्ट्रा खिलाड़ी होते है। प्रत्येक टीम को अपनी पारी खेलने और अपनी पारी पूरी करने के लिए 7 मिनट मिलते हैं।
खो खो खेल का मैदान | Kho Kho Playground
खो खो का मैदान एक बड़ा आयताकार जैसा होता है। जो 27 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा होता है। मैदान के अंत में दो छोटे आयत होते हैं जो 16 मीटर लंबे और 2.75 मीटर चौड़े होते है। मैदान के बीच में 23.50 मीटर लंबी और 30 सेंटीमीटर चौड़ी एक पट्टी होती है, जहां खो खो खेल खेला जाता है। खेल में 2 पारियां (4 बार) होती हैं। और वर्गों की संख्या 8 होती हैं।
निस्कर्स | Conclusion
दोस्तो! इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको खो-खो खेल में कितने खिलाड़ी होते हैं और इसके नियम-कायदे भी पता चल जाएंगे। इस आर्टिकल में खो खो खेल से सबंधित बहुत सारी जानकारी दी गयी है, जिन्हे जानना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना जानकारी के हम लोग कोई भी गेम नहीं खेल सकते है।

