देश में लगता है अब कुछ भी ख़ुफ़िया नहीं है यहाँ तक कि उन कश्मीरी पंडितों की लिस्ट भी जिनका कश्मीर के दूर दराज़ इलाकों से श्रीनगर के अलावा अन्य जिला मुख्यालयों पर ट्रांसफर किया गया है ताकि आतंकवादियों के टार्गेटेड हमलों से उनकी सुरक्षा की जा सके। ट्रांसफर लीक की खबर फैलते ही कश्मीरी पंडितों में गुस्से की लहर दौड़ गयी और उन्होंने जम्मू तवी पुल जामकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
बता दें कि कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों, दूसरे हिन्दुओं और गैरकश्मीरियों को लेकर लक्षित हमलों में पिछले पांच महीनों में दो दर्जन से ज़्यादा लोगों को आतंवादियों ने मारा है। लक्षित हत्याओं की बढ़ती वारदातों को लेकर केंद्र सरकार पर भारी दबाव है ऐसे में उसने उन कश्मीरी पंडितों और दुसरे हिन्दुओं को जो सरकारी सेवा में हैं, घाटी के दूरदराज इलाकों से जिला मुख्यालयों में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है. इसी कड़ी में कल यह खबर आयी थी कि कश्मीर के इलाकों में तैनात 177 कश्मीरी पंडितों को जो सरकारी नौकरी में हैं श्रीनगर ट्रांसफर कर दिया है। खबर है कि वह लिस्ट सोशल मीडिया पर लीक हो चुकी है और वायरल हो गयी है।
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लिस्ट के लीक होते ही कश्मीरी पंडितों का गुस्सा उफान पर है और सरकार के खिलाफ वह एकबार फिर सड़क पर उतर आये हैं। उनका कहना है कि ट्रांसफर लिस्ट लीक करके आतंकवादियों को उनका एक तरह से उनका पता बता दिया गया है। वहीँ सरकार अपनी साख बचाने के लिए इस बात पर अड़ी हुई है कि किसी भी हिन्दू कर्मचारी को कश्मीर से जम्मू नहीं भेजा जायेगा। वहीँ इन सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि विगत 15 वर्षों से वह लोग बिना किसी सुरक्षा के अपनी ड्यूटी करते आ रहे हैं लेकिन अब कश्मीर के हालात बहुत बुरे हो गए हैं और कश्मीरी पंडित और हिन्दू बिलकुल असुरक्षित हो गए हैं।
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177 सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर की सूची के लीक होने पर अब कश्मीर के भाजपा नेता भी सवाल उठा रहे हैं, कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर इसे सुरक्षा में बहुत बड़ी सेंध बता रहे हैं, उनका कहना है कि इस लिस्ट के लीक होने से आतंकवादियों को अब यह मालूम हो गया होगा कि कौन सा कश्मीरी पंडित कहाँ पर पोस्टेड है। वहीँ गुस्साए कश्मीरी पंडितों ने लिस्ट के लीक होने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारीयों पर फौरी तौर पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
