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Kartik Maas 2022: कार्तिक माह में दीपदान करने से प्रसन्न होते हैं पितर,केशव का मिलता है आर्शिवाद

Kartik Maas 2022:

महापुण्यदायक तथा मोक्षदायक कार्तिक के मुख्य नियमों में सबसे प्रमुख है दीपदान। दीपदान का अर्थ आस्था के साथ दीपक प्रज्वलित करना होता है। कार्तिक में प्रत्येक दिन दीपदान करने का महापुण्य बताया गया है। कार्तिक में घी अथवा तिल के तेल से जिसका दीपक जलता रहता है। उसे अश्वमेघ यज्ञ या किसी दूसरे धर्म कार्य की जरूरत नहीं है। अग्निपुराण के 200 वे अध्याय के मुताबिक दीपदान से बढ़कर न कोई व्रत है और न था और न होगा। स्कंदपुराण, वैष्णवखण्ड के अनुसार कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय और नर्मदा नदी में चन्द्रग्रहण के समय अपने वजन के बराबर तुलादान करने का जो पुण्य है वह केवल दीपदान करने भर से मिल जाता है।

कार्तिक में दीपदान का मुख्य उद्देश्य पितरों का मार्ग प्रशस्त करना है। इसलिए पितरों के निमित्त दीपदान जरूर करें। पद्मपुराण, उत्तरखंड, अध्याय 123 में महादेव कार्तिक में दीपदान का माहात्म्य सुनाते हुए पुत्र कार्तिकेय से कहते हैं। “मनुष्य के पितर अन्य पितृगणों के साथ सदा इसकी अभिलाषा करते हैं कि क्या हमारे कुल में कोई ऐसा उत्तम पितृभक्त पुत्र उत्पन्न होगा, जो कार्तिक में दीपदान करके श्रीकेशव को संतुष्ट करेगा।”

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