कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के लिए मुख्यमंत्री पद एक बड़ी सिरदर्दी है। सत्ता बरकरार रखने के लिए भाजपा ज़ोर शोर से अभियान में जुटी हुई है लेकिन उसके लिए सबसे पड़ी परेशानी मुख्यमंत्री पद को लेकर है. मुख्यमंत्री बोम्मई तो इस पद पर पहले से बैठे हैं लेकिन सभी जानते हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद के लिए कितना लालायित हैं. पिछ्ला चुनाव हारने के बावजूद भी वो लगातार कुमारस्वामी सरकार को गिराने में लगे रहे और अंततः सरकार गिराकर ही दम लिया। अब जबकि उनकी जगह पर बोम्मई साहब विराजमान हैं तो उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान द्वारा लिया जाएगा।
आलाकमान पर छोड़ दिया फैसला
येदियुरप्पा मुख्यमंत्री के सवाल का जवाब देते हुए हमेशा बात को घुमा देते हैं. इस सवाल के जवाब येदियुरप्पा पार्टी आलाकमान पर फैसला छोड़ देते हैं. उनका कहना है कि बात पर अंतिम फैसला तो आला कमान ही करता है. येदियुरप्पा ने कहा कि अगर कोई और मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी. उन्होंने दावा किया कि इसबार विधानसभा चुनाव में भाजपा को 140 सीटें मिलने जा रही हैं.
लिंगायतों पर किया दावा
येदियुरप्पा ने पूर्व सीएम एच.डी. कुमारस्वामी के भाजपा को ब्राह्मणों की पार्टी बताने वाले बयानों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले भाजपा को लिंगायतों की पार्टी कहा जाता था और अब इसे ब्राह्मणों की पार्टी कहा जा रहा है। उन्होंने दवा किया कि 90 फीसदी लिंगायत बीजेपी के साथ खड़े हैं। इससे अलग केंद्रीय गृह मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व में लड़े जाएंगे। यही बात कर्नाटक राज्य प्रभारी अरुण सिंह भी कई बार दोहरा चुके हैं। अब ऐसे में येदियुरप्पा के लिए मुखयमंत्री बनने का कोई मौका बनता है यह कहना अभी मुश्किल है. येदियुरप्पा ने हालाँकि अभी हार नहीं मानी है पार्टी के अंदर एक बड़ा धड़ा इस बात को कहा रहा है कि चुनाव मोदी जी के नाम पर लड़ा जाये और राज्य में सामूहिक नेतृत्व उसकी अगुवाई करे, मुख्यमंत्री का फैसला बाद में किया जाय.
