उत्तरकाशी- देवभूमि उत्तराखंड में कई धार्मिक स्थल ऐसे हैं जो अपनी धार्मिक मान्यता और पौराणिकता के लिए जाने जाते हैं. आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं जो लोगों के लिए न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि न्यायालय का भी दर्जा रखता है. यहां के देवता का आदेश भक्तों के लिए अंतिम आदेश होता है जिसे लोगों को मानना ही पड़ता है. हम बात कर रहे हैं उत्तरकाशी के कंडार देवता मंदिर की, स्थानीय मान्यता है कि यह मंदिर हर मर्ज की दवा है कंडार देवता लोगों को रोगों से मुक्ति देने के साथ-साथ शुभ लग्न, मुंडन, विवाह की तारीखें तक बताते हैं. जब कभी आप गंगोत्री यमुनोत्री मंदिर की यात्रा पर उत्तराखंड आए तो उत्तरकाशी के प्रसिद्ध मंदिर में एक बार जरूर दर्शन करें.
यहां डोली सुनाती है फैसला
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से करीब 14 किलोमीटर दूर वर्णावत पर्वत की शिखर पर कंडार देवता का मंदिर स्थित है. यह मंदिर न केवल भक्तों के लिए बल्कि आसपास के कई गांव के लिए समृद्धि और खुशहाली का पर्याय है. यह मंदिर लोगों के लिए न्यायालय का दर्जा रखता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां फैसला कंधार देवता की डोली सुनाती है. यहां आने वाले श्रद्धालु कंडार देवता मंदिर परिसर में डोली को कंधे पर लेकर कंडार देवता को याद करता है. जिसके बाद डोली डोलने लगती है और डोली का अगला हिस्सा जमीन पर कुछ रेखाएं बनाती है. इन रेखाओं से में तिथि और समय लिखा होता है. कहा जाता है कि जन्म कुंडली भी डोली इसी तरह रेखा खींचकर बनाती है.

हर मर्ज की दवा कंडार देवता
उत्तरकाशी जिले से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित संग्राली गांव के आसपास करीब एक दर्जन गांव के लिए कंडार देवता हर मर्ज की दवा है. लोग यहां जन्मपत्री, विवाह, मुंडन, जनेऊ, मकान बनाने का दिन सहित कई संस्कारों की तिथि तय करने के लिए आते हैं. खंडार देवता मंदिर परिसर में लोग अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं और कंधे पर डोली रखकर देवता का स्मरण करते हैं. जिसके बाद देवता ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करते हैं कहा जाता है कि इस मंदिर परिसर में आने मात्र से सभी रोगों का निवारण होता है. इस गांव में साल में एक बार भंडानी मेले का आयोजन किया जाता है. जिसमें पारंपरिक लोक नृत्य कर ग्रामीण अपने आराध्य कंडार देवता से सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.

