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कैराना हाट सीट तो मुजफ्फनगर में ध्रुवीकरण की परीक्षा,दंगों की तपिश से मतदाताओं को पिघलाने की कोशिश में भाजपा


कैराना हाट सीट तो मुजफ्फनगर में ध्रुवीकरण की परीक्षा,दंगों की तपिश से मतदाताओं को पिघलाने की कोशिश में भाजपा

मेरठ। UP Chunav hot seat Kairana – पहले चरण के चुनाव में सहारनपुर मंडल के दो जिलों शामली और मुजफ्फरनगर में मतदान होना है। इन दोनों जिलों में 2017 में भाजपा का कमल खिला था। जबकि बाकी दलों को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा को मुजफ्फरनगर दंगा और जाट किसानों की सहानुभूति मिली थी। जिसके चलते कमल जोरदार तरीके से खिला था। लेकिन इस बार इन दोनों जिलों में परिस्थिति बदली हुई है। बात शामली जिले की करें तो इस जिले में तीन सीटों आती हैं। जिसमें कैराना,थानाभवन और शामली शहर है। इसमें तीनों ही सीटें पश्चिमी उप्र की राजनीति के लिहाज से हॉट मानी जा रही है। बात कैराना की करें तो यहां पर पलायन का मुददा भाजपा ने एक बार फिर से उठा दिया है। जिसके चलते ध्रुवीकरण की पूरी कोशिश भाजपा की ओर से की गई है। यहां पर भाजपा के पूर्व सांसद दिवंगत हुकुम सिंह का सिक्का चलता था। दो परिवार की राजनीति के बीच तीसरा कोई दिगगज नहीं टिक सका। इन दो परिवार में एक बाबू हुकुम सिंंह का परिवार है जबकि दूसरा नाहिद हसन का। कैराना पलायन का असर जिले की दूसरी सीटों पर देखा जा सकता है। कैराना से भाजपा ने दिवंगत नेता हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को उतारा है तो सपा ने अपने विधायक नाहिद हसन पर ही दांव लगाया है। मृगांका सिंह पहले भी चुनाव लड़ी थी लेकिन हार गईं थी। उसके बाद से वे लगातार क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। यह सीट मुस्लिम बाहुल्य होने के कारण यहां पर गठबंधन ने जाट मुस्लिम कार्ड चला है। कांग्रेस ने यहां से अखलाक को मैदान में उतारा है। कांग्रेस भी मुस्लिम वोटरों में सेंधमारी करने की कोशिश में है। इसे अलावा प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा थानाभवन से इस बार भी चुनावी मैदान में हैं। रालोद ने थाना भवन से अशरफ अली को टिकट दिया है। यहां पर इस बार मुकाबला काफी तगड़ा है। बात शामली सीट की करें तो इस सीट पर गठबंधन और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है।

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किस हद तक होगा ध्रुवीकरण का असर :

जिला मुजफ्फरनगर की राजनीति का पश्चिमी उप्र में बहुत प्रभाव पड़ता है। यहां पर 2017 की तरह ही इस बार भी ध्रुवीकरण होता दिखाई दे रहा है। अलग बात है कि असर किस हद तक जाएगा। लेकिन किसान आंदोलन,गन्ने का मुददा के बीच दंगा, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था का असर भी वोटरों पर पड़ेगा। रालोद सपा गठबंधन जहां किसान आंदोलन और गन्ना मुददा को भुनाने की कोशिश कर रही है वहीं भाजपा सुरक्षा कानून—व्यवस्था और दंगा जैसे अस्त्र के सहारे मैदान में है। यहां की शहर सीट पर भाजपा और रालोद ने जीत के लिए पूरी ताकत लगाई है। इस जिले की ही पुरकाजी विधानसभा, विधानसभा बुढ़ाना,चरथावल सीट पर मुकाबला काफी कड़ा है। गठबंधन ने गन्ना मुददा और तीन कृषि कानून को हवा दी है। तो वहीं भाजपा सुरक्षा कानून व्यवस्था के जरिए दंगों की तपिश से भी वोटरों को जगा रही है। शहर सीट पर विधायक कपिलदेव अग्रवाल भाजपा के परंपरागत वोटों के सहारे हैं। यहां से रालोद के सौरभ स्वरूप भी मैदान में हैं। मीरापुर सीट पर भी भाजपा ने प्रशांत गुर्जर तो रालोद से चंदन चौहान पर दांव खेला है। खतौली सीट पर भी भाजपा और गठबंधन के बीच मुकाबला है। लेकिन बसपा प्रत्याशी भी कुछ कम नहीं है।

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