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Justice UU Lalit: देश के नए मुख्य न्यायाधीश होंगे जस्टिस यूयू ललित, चीफ जस्टिस ने केंद्र को भेजा नाम

नई दिल्ली। देश के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित होंगे। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस रमना ने नए चीफ जस्टिस के लिए जस्टिस यूयू ललित का नाम केंद्र सरकार को सिफारिश को लिए भेजा है। परम्परा के अनुसार ही रिटायर होने वाले मौजूदा चीफ जस्टिस ही नए मुख्य न्यायाधीश के नाम की सिफारिश करते हैं। आगामी 26 अगस्त को चीफ जस्टिस रमना रिटायर हो रहे हैं। बता दें कि जस्टिस यूयू ललित मुसलमानों में ‘तीन तलाक’ की प्रथा को अवैध ठहराने सहित कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा बन चुके हैं।  वह ऐसे दूसरे मुख्य न्यायाधीश होंगे, जिन्हें बार से सीधे शीर्ष अदालत की पीठ में पदोन्नत किया गया। उनसे पहले जस्टिस एसएम. सीकरी मार्च 1964 में शीर्ष अदालत की पीठ में सीधे पदोन्नत होने वाले पहले वकील थे। वह जनवरी 1971 में 13वें सीजेआई बने थे।
जस्टिस ललित मौजूदा चीफ जस्टिस एनवी रमण के सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद 27 अगस्त को भारत के 49 वें सीजेआई बनने के लिए लाइन में हैं। जस्टिस ललित को 13 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया था। वो उससे पहले जाने-माने वकील थे। जस्टिस ललित उसके बाद से शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा बन चुके हैं। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अगस्त 2017 में 3-2 के बहुमत से ‘तीन तलाक’ मामले को असंवैधानिक घोषित किया था। उन तीन न्यायाधीशों में जस्टिस ललित भी एक थे। 

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जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने यौन अपराधों से बच्चो के संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक मामले में मुंबई उच्च न्यायालय के ‘‘त्वचा से त्वचा के संपर्क’’ संबंधी विवादित फैसले को खारिज किया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि यौन हमले का सबसे महत्वपूर्ण घटक यौन मंशा होती है। बच्चों की त्वचा से त्वचा का संपर्क नहीं। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में जस्टिस ललित की पीठ ने कहा था कि त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार के पास केरल में ऐतिहासिक पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन का अधिकार है।.
नौ नवंबर, 1957 को जन्मे जस्टिस ललित ने 1983 में  वकील के रूप में पंजीकरण कराया था। दिसंबर 1985 तक मुंबई हाईकोर्ट में वकालत की। उसके बाद वो जनवरी 1986 में दिल्ली आकर वकालत करने लगे। जहां पर अप्रैल 2004 में उन्हें शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सुनवाई के लिए उन्हें सीबीआई का विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया था।

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