Uttarakhand News Today: वन विभाग के गेस्ट हाउस में ठहरना और जंगल सफारी अब होगा महंगा,फोटोग्राफी पर देना होगा शुल्क

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देहरादून। उत्तराखंड के वन विभाग के गेस्ट हाउस में ठहरना और जंगल में सफारी के लिए अ​ब ​अधिक जेब ढीली करनी होगी। वन विभाग गेस्ट हाउस में रुकने और जंगल सफारी के लिए वन विभाग की ओर से कीमत बढ़ाने की तैयारी है। अब इसके लिए अधिक दाम चुकाने पड़ेंगे। वन विभाग की ओर से ईको टूरिज्म के अलावा पर्यावरण पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों पर अब शुल्क लगाए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

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जिसके तहत अब पांच से दस फीसद तक शुल्क में बढ़ोतरी की जा सकेगी। वहीं दूसरी तरफ फिल्म शूटिंग, डॉक्यूमेंट्री शूटिंग के अलावा पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों के लिए शुक्ल घटाने का प्रस्ताव है। उत्तराखंड में छह राष्ट्रीय उद्यान के अलावा सात वन्य जीव विहार और चार संरक्षित वन क्षेत्र हैं। इसके  अलावा इन वन क्षेत्रों में 14 ईको टूरिज्म हैं। जहां पूरे साल पर्यटकों की भारी भीड़ जुटी रहती है। 

 

इनमें कैंपिंग,वन्य जीव सफारी, बर्ड वॉचिंग, हाईकिंग, बटरफ्लाई वॉचिंग, एंग्लिंग, नेचर वॉक,  के अलावा ग्रामीण पर्यटन गतिविधियां संचालित होती रहती हैं। मजे की बात है कि बीते कुछ सालों में इन गतिविधियों के तहत यहां पर पर्यटकों की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। 2021—22 के वित्तीय वर्ष में प्रदेश सरकार को इसी ईको टूरिज्म और पर्यावरण पर्यटन से 17.38 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्त हुई थी। इसमें सबसे अधिक राजस्व जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से हुआ था। मुख्य वन संरक्षक ईको टूरिज्म के डॉ. पराग मधुर का कहना है कि जिन गतिविधियों में शुक्ल बढ़ाने की योजना है।

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उनमें गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम, एंग्लिंग,वाइल्ड लाइफ सफारी, फोटोग्राफी, वाहनों की एंट्री और प्रतिव्यक्ति एंट्री शुक्ल  शामिल हैं। इसके अलावा बर्ड वाचिंग, ट्रैकिंग रूट, नेचर ट्रैल पर पहली बार शुक्ल लगाया जाने की योजना है। प्रदेश का ईको टूरिज्म कम दाम में अधिक मुनाफे वाला सौदा है। लेकिन पिछले 13 साल से इसके शुल्क निर्धारण में कोई परिवर्तन  नहीं किया गया। वर्ष 2009 में आखिरी बार संबंधित गतिविधियों पर शुल्क निर्धारित किया था। मुख्य वन संरक्षक ईको टूरिज्म डॉ. पराग मधुर का कहना है कि ईको टूरिज्म के तहत अ शुल्क निर्धारित किया गया है। इसकी फाइल शासन को भेजी है। सब कुछ ठीक रहा तो अगले महीने से नई दरें लागू की जाएंगी

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