- जो बाइडेन ने कभी निभाई भारत से दोस्ती तो कभी किया विरोध
- राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडेन को भी स्थायी दोस्त की जरूरत होगी
सुनील शर्मा
न्यूज डेस्क। अमेरिका में हो रहे राष्ट्रपति चुनाव पर भारत की निगाह बनी हुई है। अभी तक मिले आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी जो बाइडेन की जीत सुनिश्चित लग रही है। माना जा रहा है कि उनकी जीत की घोषणा बस कुछ समय की बात रह गयी है। ऐसे में जो बाइडेन के राष्ट्रपति बन जाने के बाद अमेरिका और भारत के संबंध कैसे रहेंगे।
क्या पाकिस्तान और चीन के साथ मौजूद तनाव की स्थिति में अमेरिका पहले की तरह भारत का साथ देगा। क्या भारतीयों को एच1बी वीजा देने की नीतियां भारत के हित में होंगी। इन सवालों का जवाब तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। मगर जो बाइडेन के पूर्व में दिये गये बयान और भारत के प्रति उनके रूख पर नजर डाले तो यह लगता है कि उनका राष्ट्रपति बनना भी भारत के हित में ही होगा।
हालांकि कुछ मौकोें पर जो बाइडेन भारत की नीतियों की खिलाफत भी करते नजर आये हैं। लेकिन कहा जाता है कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। ऐसे में राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडेन को विश्वसनीय और स्थायी दोस्त की जरूरत होगी जो भारत से बेहतर कोई नहीं हो सकता।
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति बने रहने के दौरान भारत और अमेरिका के संबंधो ने दोस्ती के नये आयाम स्थापित किये थे। अनेक मौकों पर डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को अपना दोस्त बताया और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भी उनके रिश्ते काफी अच्छे रहे। पाकिस्तान और चीन के मुद्दे पर अमेरिका ने भारत को अपना समर्थन दिया। ऐसे में यदि वह राष्ट्रपति चुनाव हार जाते हैं तो यह निःसंदेह भारत के लिये चिंतनीय होगा।
लेकिन बात करें डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रत्याशी जो बाइडेन की तो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में उप राष्ट्रपति रहे जो बाइडेन ने भारत के स्वतंत्रता दिवस पर संदेश जारी कर कहा था कि ‘मैंने सीनेटर और उपराष्ट्रपति के तौर पर भारत के साथ काम किया है, मैंने पहले भी कहा था कि अगर अमेरिका और भारत एक गहरे दोस्त बनते हैं तो पूरी दुनिया सुरक्षित हो जाएगी।’ जो बाइडेन ने दावा किया था कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान सबसे अधिक भारतीय मूल के लोगों को सरकार में जगह मिली थी। जो बाइडेन ने भारत और अमेरिका के बीच 2008 में ऐतिहासिक परमाणु डील कराने में अहम भूमिका निभाई थी। वहीं उनके साथ उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार साथ कमला हैरिस हैं जो इस पद पर काबिज होने वाली पहली भारतीय मूल की महिला हो सकती हैं।
भारत के साथ दोस्ती निभाने वाले डोनाल्ड ट्रंप के कई फैसलों ने भारत को मुश्किलों में भी डाला है। भारतीयों को एच1बी वीजा दिये जाने की नीतियों को परिवर्तित कर डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीयों की नाराजगी मोल ले ली थी। वहीं भारत के साथ व्यापारिक समझौते और पर्यावरण परिवर्तन पर पेरिस समझौते पर लिये निर्णय भी भारत के लिये अच्छे नहीं रहे। वहीं जो बाइडेन इन फैसलों का विरोध कर भारत के साथ खड़े रहे हैं।
पाकिस्तान- चीन के प्रति रवैये पर निर्भर हैं भारत से संबंध
जो बाइडेन यदि राष्ट्रपति बन जाते हैं तो भारत के साथ अमेरिका के रिश्तेे इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि जो बाइडेन का रूख पाकिस्तान और चीन के प्रति कैसा रहेगा। जो बाइडेन ने पाकिस्तान को कई मौकों पर समर्थन दिया है। वहीं चीन के प्रति उनका रवैया स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यदि वह पाकिस्तान और चीन के प्रति दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं तो स्वाभाविक है कि भारत से उनकी दूरियां बढ़ जायेंगी। क्योंकि ट्रंप पाकिस्तान और चीन के खिलाफ काफी सख्त रूख अपनाते रहे हैं। ट्रंप ने कई बार पाकिस्तान का नाम लेकर इस्लामिक आतंकवाद की भत्र्सना की है।
वहीं जो बाइडेन और कमला हैरिस ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के बाद मानवाधिकार के मसले और नागरिकता संशोधन एक्ट को लेकर भारत में हुए प्रदर्शन पर भारत सरकार के रुख की आलोचना की थी। लेकिन आतंकवाद के मसले पर जो बाइडेन का सख्त रुख रहा है। अपनाते नजर आए हैं, वहीं चीन की नीतियों की भी उन्होंने आलोचना की है।
अमेरिका और भारत को है एक-दूसरे की जरूरत
वर्तमान में अमेरिका को भी भारत की दोस्ती की बेहद आवश्यकता है। सर्वशक्तिशाली अमेरिका आज कोरोना के कारण घुटने टेकने की स्थिति में आ चुका है। वहीं उसके एकछत्र राज को चुनौती देने को चीन पूरी तरह से तैयार है। ऐसे में अमेरिका को भी एक मजबूत दोस्त चाहिये जो उसका हर कदम पर साथ दे सके। पूर्व के अनुभवों से अमेरिका जानता है कि भारत से अच्छा दोस्त उसके लिये कोई नहीं है। वहीं भारत भी शक्तिशाली देश के रूप में उभर रहा है। ऐसे में चीन को काबू में रखने के लिये भारत का साथ होना जरूरी है।
वहीं पाकिस्तान और चीन से तनावपूर्ण संबंधो के बीच भारत को भी अमेरिका का साथ चाहिये। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनेक मौकों पर भारत का साथ निभाते हुए पाकिस्तान और भारत को सीधे चेतावनी भी दी है। ऐसे में भारत भी यही चाहेगा कि अमेरिका और भारत के संबंध पहले की तरह बने रहें।

