वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम की जयन्ती का दिन होता है। वहीं हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म इसी तिथि यानी वैशाख मास की तृतीया तिथि को प्रदोष काल में हुआ था। बताया जाता है कि परशुराम का जन्म धरती पर राजाओं द्वारा किये जा रहे अत्याचार को रोकने के लिये हुए था, वहीं मान्यता है कि भगवान परशुराम अमर है और आज भी जिंदा हैं।
इस समय करें आज के दिन भगवान परशुराम की पूजा-
तृतीया तिथि की शुरुआत- 3 मई, मंगलवार सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर शुरू।
तृतीया समाप्ति का समय- 4 मई, 2022 सुबह 7 बजकर 30 मिनट तक।
जानें पूजा का महत्व और मंत्र-
मान्यता है कि भगवान परशुराम का जन्म इस धरा से अत्याचार को खत्म करने के लिये हुआ था, वहीं भगवान परशुराम के पिता का नाम जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था। दूसरी तरफ भगवान परशुराम को आदि देव शिव का एकमात्र शिष्य माना जाता है, क्योंकि इन्होंने कठोर तप के जरिये भगवान शिव को प्रसन्न किया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें परसु( फरसा) मिला था। वहीं ऐसा कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और निःसंतान लोग इस व्रत को करते हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि और मंत्र-
सर्वप्रथम ब्रम्ह मुहूर्त में स्नान करके एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर भगवान परशुराम की मूर्ति या तश्वीर को स्थापित कर लें। ठीक इसके बाद मूर्ति या तश्वीर पर जल, चंदन, अक्षत, गुलाल, फूल इत्यादि चढ़ाएं, इसके साथ ही भोग में फल या मिठाई उनके सम्मुख रख दें। इसके साथ ही पूरे दिन बिना अनाज खायें व्रत का पालन करें।
मंत्र-
ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्।।

