टोक्यो। जापान में पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या ने एक बार फिर से राजनेताओं की सुरक्षा पर सवाल उठा दिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के बाद अब राजनेताओं की सुरक्षा की फिर से समीक्षा की बात उठने लगी है। वहीं प्रोफेसर कावामोटो ने कहा कि जापान में इस तरह की बंदूक हिंसा की घटना एक वेकअप काल है। यह मान लेना कि अब इस तरह का हमला कभी नहीं होगा गलत है। शिंजो आबे की हत्या में शामिल हथियार होम मेड है। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा बंदूक नियंत्रण प्रविधान रोकथाम के लिए अप्रभावी हैं।
जापान में कानून के तहत, बंदूकों, चाकू और धनुष विशेष लाइसेंस के बिना अवैध हैं। इनका आयात गैर कानूनी है। जापान में जो हथियार रखना चाहते हैं। उन्हें कठोर जांच से गुजरना पड़ता है। इसके लिए चिकित्सक मंजूरी जरूरी होती है। इतना ही नहीं परिवारिक सदस्यों के बारे में जानकारी देनी होती है। लाइसेंस धारक को परीक्षण पास करना होता है कि वह हथियार का उपयोग सही से करना जानता है। बंदूक खरीदने वालों को विशेष लाकिंग सिस्टम खरीदना होता है।
जापान में शिकार के लिए अतिरिक्त विशेष लाइसेंस की जरूरत होती है। पुलिस अधिकारी जापान में शायद ही कभी अपनी पिस्तौल से फायरिंग करते हो। आर्मामेंट रिसर्च सर्विसेज निदेशक और हथियार जांच फर्म विशेषज्ञ एनआर जेनजेन जोन्स का कहना है कि शिंजो आबे की हत्या में विशेष हथियार का उपयोग किया गया है। उन्होंने हथियार की तुलना गृहयुद्ध युग की बंदूक से की है। जिसमें बारूद को अलग से बुलेट में लोड किया जाता था।

