देवबंद में कल जमीयत उलेमा-ए हिंद (Jamiat Ulema-E-Hind Deoband) के राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन रात को हुए दूसरे दौर में शिरकत करने के लिए संगठन के दूसरे गुट के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश इन्साफपसंद लोगों से अभी खाली नहीं हुआ है, उन्होंने कहा कि जो लोग मुस्लिम इबादतगाहों को जला रहे हैं वह लोग दरअसल श्रीलंका जैसे हालात पैदा करना चाह रहे हैं.
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हमारा मुकाबला मज़हब से नहीं बल्कि सत्ता में बैठे उन लोगों से है जो मज़हब के नाम पर लोगों को बांटना चाहते हैं, मुल्क को बर्बाद करना चाह रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई सरकार से है, हम संविधान के दायरे में रहकर उससे अपना हक़ मांगेंगे। उन्होंने कहा है बहुसंख्यकों के खिलाफ अल्पसंख्यकों का सड़क उतरना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि हमने बाबरी मस्जिद के लिए बहुत लम्बी लड़ाई लड़ी लेकिन उस मसले को सड़क पर लाना हरगिज़ सही नहीं था.
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इस दौरान उन्होंने सौ साल पुराने इस संगठन के दोनों गुटों के फिर से एक हो जाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि वह दिन जल्द आएगा जब सब एक होंगे। बता दें कि इस समय जमातुल उल्माए हिन्द के दो गुट हैं. एक गट के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी हैं और दूसरे गुट के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी हैं। बता दें कि मौलाना अरशद मदनी मौलाना महमूद मदनी के सगे चचा हैं. जमीअत में अलगाव 2006 में हुआ जब मौलाना महमूद मदनी के वालिद मौलाना असद मदनी का निधन हो गया था. तब से मौलाना अरशद मदनी और मौलाना महमूद मदनी की राहें जुड़ा हो गयीं।
