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Population imbalance: जनसँख्या असुंतलन पर लगाम लगाना ज़रूरी, विजयदशमी पर बोले संघ प्रमुख

bhagwat

Population imbalance: विजयदशमी के मौके पर नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने आज अपने सम्बोधन में जनसँख्या असुंतलन पर ज़ोर देने के साथ ही महिला शक्ति पर बात की. भागवत के मुताबिक देश को ऐसी जनसँख्या नियंत्रण पालिसी की ज़रुरत है जिसमें किसी भी धर्म सम्प्रदाय को छूट न मिलती हो. उन्होंने कहा कि जनसँख्या असुंतलन के गंभीर परिणाम देश भुगत रहा है. इसलिए आगा ज़रूरी कदम नहीं उठाये गए देश में धर्म आधारित असंतुलन बढ़ता जायेगा, इसलिए इसे अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

संघ प्रमुख ने कहा कि यह बात सही है जितनी अधिक आबादी उतनी ही ज़यादा परेशानी, हमें यह भी देखना होगा कि देश कितने लोगों को खिला सकता है, कितनी आबादी झेल सकता है. जनसँख्या का अगर ठीक से उपयोग हो तो वह साधन बन सकता है, इसलिए सोच समझकर जनसँख्या नीति तैयार की जनि चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अगले 30 वर्षों तक युवा बना रहेगा क्योंकि यहाँ की 57 करोड़ आबादी युवा है जबकि चीन बूढ़ा हो चला है, वहां एक परिवार एक बच्चे की नीति है. भागवत ने सनातन धर्म पर भी बात की, उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए सनातन के साथ नए बदलाव जरूरी हैं. सनातन लोगों को भटकाव से रोकता है. जो काम मातृशक्ति कर सकती है, वो पुरुष नहीं कर सकते हैं. महिलाओं का सशक्तिकरण करना और उनको काम करने की आज़ादी देना महत्वपूर्ण है.

भगवत ने कहा कि समाज में स्वार्थ व द्वेष फैलाया जा रहा है, ऐसे तत्वों के बहकावे में न फंसते हुए उनका निर्भयतापूर्वक प्रतिकार करना चाहिए. भागवत ने कहा कि देश सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की ओर ले बढ़ रहा है, विश्व के राष्ट्रों में भारत की विश्वसनीयता बढ़ गई है. सुरक्षा पर हम अधिकाधिक स्वावलंबी होते जा रहे हैं, नयी शिक्षा नीति की तरफ पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है. बता दें कि संघ के विजयदशमी उत्सव में मुख्या अथिति पर्वतारोही संतोष यादव थी , संघ के कार्यक्रम में किसी महिला का मुख्य अतिथि होने का यह पहला मामला माना जा रहा है हालाँकि संघ प्रमुख ने कहा कि संघ के कार्यक्रमों में अतिथि के रूप में महिलाओं का आना अक्सर होता रहा है.

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