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बलिया से डरना भी जरूरी है…


बलिया से डरना भी जरूरी है…

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। एक वर्चुअल संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का यह कहना की अब तो बलिया का नाम लेने से भी डर लगता है, आज चर्चाओं में हैं। यह बात कह सीएम का हंसना भले ही कुछ लोगों को बेहद पसंद आ रहा हो, भले ही यह उनके मजाक करने का अंदाज माना जा रहा हो। मगर इन बातों के बीच बलिया के नाम से डरना सीएम की चिंता को भी दर्शाता है।

बात चाहे हाथरस की हो या बुलंदशहर की, चाहे महिला उत्पीड़न की हो या व्यापारियों के लुटने की, जनता भी समझती है कि हर जगह पुलिस मौजूद नहीं रह सकती। मगर बलिया में जो कुछ हुआ वह पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। हत्यारे को पुलिस ने पकड़ा, फिर भी वह फरार हो गया। तुर्रा यह है बैरिया विधायक खुद हत्यारे के समर्थन में खड़े दिखाई दिये और उसका पक्ष में बयान भी जारी कर दिया।ऐसे में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पहले से विपक्षी दलों के सवालों से घिरी सरकार को बैरिया विधायक के बयानों ने और संकट में डाल दिया। ऐसे में सीएम का बलिया का नाम लेने से भी डरना अस्वभाविक नहीं है।

दरअसल, मिशन शक्ति लांच होने के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने आवास पर महिला जनप्रतिनिधियों (प्रधान, बीडीसी सदस्य, ब्लाॅक प्रमुख, पार्षद नगरीय निकायों के अध्यक्षों), स्वयंसेवी संगठनों और शिक्षिकाओं से ऑनलाइन वार्ता कर रहे थे। इस दौरान जब बलिया की जनप्रतिनिधि ने अपना परिचय दिया तो सीएम कह पडे़ की अब तो बलिया का नाम लेने से भी डर लगने लगा है। हालांकि यह कहने के बाद सीएम योगी और मौजूद अधिकारी, जनप्रतिनिधि हंस पड़े और मामला एक मजाक का बन कर रह गया।

मगर उत्तर प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था के मुद्दे पर चौतरफा घिरे सीएम योगी का यह कहना अनायास नहीं है। गौरतलब है कि पिछले दिनों बलिया जिले के दुर्जनपुर गांव में कोटे की एक दुकान को लेकर हुए विवाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में एक हत्या हो गयी थी। बैरिया के भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह के करीबी माने जाने वाले मुख्य आरोपी भाजपा कार्यकर्ता धीरेंद्र सिंह ने गोली चला कर एक व्यक्ति की जान ले ली थी।

पुलिस की मौजूदगी में हत्या, पुलिसकर्मियों का हत्यारोपी को पकड़ लेना, फिर पुलिस की पकड़ से निकलकर धीरेन्द्र सिंह का मौके से फरार हो जाना, उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है। यह हत्याकांड पुलिस के कम होते रसूख और बाहुबलियों के बढ़़ते हौसले को दर्शाता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि धीरेन्द्र सिंह के सत्तारूढ पार्टी से जुड़ा होने के कारण ही पुलिसकर्मियों ने उसे वहां से निकल जाने का मौका दिया है।

इस हत्याकांड से सवालों के घेरे में आई योगी सरकार ने पुलिस को कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया तो पुलिस ने हत्यारोपी के भाईयों को गिरफ्तार कर लिया। मगर खुद को पाक-साफ साबित करने के सरकार के प्रयासों पर खुद बैरिया के भाजपा विधायक ने पानी फेर दिया।

बलिया हत्याकांड के मुख्य आरोपी धीरेन्द्र सिंह के बचाव में उतरे बैरिया के भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने मीडिया में बयान जारी कर साफ तौर पर कहा कि धीरेन्द्र सिंह ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र सिंह अगर आत्मरक्षा में गोली नहीं चलाता तो उसके परिवार के दर्जनों लोग मारे जाते।

उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे पक्ष के कई लोग बुरी तरह घायल हैं, तो उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए। जिन लोगों ने लाठी से डंडों से मारकर 6-6 लोगों को घायल किया है उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। कहा कि जो घटना हुई है वह निंदनीय है, लेकिन पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है। प्रशासन से आग्रह है कि वो दोनों पक्षों को देखे।

अपनी ही सरकार में पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा बताने वाले और सरेआम गोली चला कर एक व्यक्ति को मौत के घाट उतारने वाले के पक्ष में खड़े होने वाले बैरिया के भाजपा विधाायक ने सरकार को और संकट में डाल दिया है। वहीं हाथरस प्रकरण के बाद एकजुट हुआ विपक्ष इस मुद्दे को हवा देकर सरकार को घेरने का पुरजोर प्रयास कर रहा है।

ऐसे में यह कहना जरूरी है की बलिया का नाम लेने से डरने से कुछ बदलने वाला नहीं है बल्कि बलिया हत्याकांड से सबक लेकर इसकी पुनरावृत्ति रोकना जरूरी है। जरूरी है कि अपराधियों पर कानून का शिकंजा कसने के साथ हत्यारों का खुलेआम समर्थन करने वाले जनप्रतिनिधियों पर भी लगाम कसी जाये। क्योंकि ऐसे बयान बहादुर न केवल सरकार की छवि को खराब करते हैं बल्कि प्रदेश की जनता में बाहुबलियों के खौफ को बढ़ाने का काम भी करते हैं। स्वच्छ छवि और कठोर प्रशासक की भूमिका में खरे उतरने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ को इस दिशा में भी कडे़ संदेश देने की आवश्यकता है।

क्योंकि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और बयान बहादुरों को अभी से नहीं संभाला गया तो उत्तर प्रदेश में विपक्ष को एकजुट होने और जनता को खिलाफ होने में देर नहीं लगेगी। और ऐसी चूक किसी भी सरकार को भारी पड़ सकती है।

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