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Uttarakhand News: धामी सरकार के लिए परेशानी बन रहे सियासत में भ्रष्टाचार के ये मुददे,कांग्रेस घेरने की कवायद में जुटी

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों भ्रष्टाचार के कुछ मुद्दे खूब गरमा रहे हैं। इनमें नियुक्तियों में धांधली से लेकर बैक डोर एंट्री और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग व विधानसभा की भर्तियों पर जांच मामला गरमा रहा है। जिसमें अब कांग्रेस धामी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। महिलाओं और राज्य में युवा आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण के मुद्दे पर अिब प्रदेश में सयासी जोर आजमाइश तेज हो चुकी है। भू कानून समिति की सिफारिशों पर छिड़े संग्राम ने सियासी पारे को और चढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सिफारिशों को एक मजबूत भू कानून की दिशा में पहल बता रहे हैं, तो वहीं विपक्ष इसे सिरे से खारिज कर पिछले पांच साल में बांटी भूमि का हिसाब मांग रहा है। 

विपक्ष की सीबीआई जांच की मांग के बीच उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में पेपर लीक में अब एसटीएफ पूरी तरह से शिकंजा कस चुकी है। अब तक 34 आरोपी जेल में है। सीबीआई जांच के सवाल पर सीएम का कहना है कि एसटीएफ की जांच सही दिशा में है। वर्ष 2012-17 और वर्ष 2017-2022 के बीच विधानसभा में बैकडोर भतÊ की जांच शुरू हो चुकी है। सबकी निगाहें जांच समिति पर है। जांच की आंच में कौन कितना तपता है। कठघरे में सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस सरकारों के स्पीकर के फैसले हैं। 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पहले कार्यकाल में राज्य में सशक्त भू कानून की मांग पर एक समिति गठित की थी। समिति अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप चुकी है और अब इस पर सियासत गरमा उठी है। सत्तारूढ़ भाजपा सिफारिशों को भू सुधार की दिशा में मील का पत्थर बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे सिरे से खारिज कर रहा है। सिफारिशों पर भाजपा और कांग्रेस के मध्य आरोप-प्रत्यारोप की जंग शुरू हो गई है।

सरकारी नौकरियों में महिलाओं के 30 फीसद आरक्षण पर उच्च न्यायालय की रोक के बाद सरकार के सामने इसको बचाने की चुनौती है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला कर चुकी है। उधर, कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 फीसद आरक्षण का विधेयक पुनर्विचार के लिए लौटने के बाद इस मुद्दे पर सियासत गरम है। नया विधेयक लाने की मांग अब तेजी से उठ रही है। सरकार दो विकल्पों पर काम कर रही है। पहला वह आंदोलनकारियों के आरक्षण को असांविधानिक करार देने वाले आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले में फिर से नए सिरे से पैरवी करेगी।

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