BRICS Countries: ईरान ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए किया आवेदन, अमेरिका की बढ़ी धड़कन

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नई दिल्ली। विश्च के सबसे ताकतवर और अमीर देशों के समूह ब्रिक्स की सदस्यता के लिए अब ईरान ने आवेदन किया है। इससे अमेरिका की धड़कन बढ़ गई है। ईरान के आवेदन ने ब्रिक्स-राष्ट्रों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी। हालांकि ब्रिक्स की सदस्यता लेने के लिए लातिनी अमेरिकी देश अर्जेंटीना भी आवेदन कर चुका है। लेकिन अमेरिका को सबसे अधिक परेशानी ईरान के आवेदन करने को लेकर है। बाकी देश भी उत्सुकता और आशंकाएं ईरान को लेकर व्यक्त कर रहे हैं। अमेरिका और ईरान के संबंध कई दशकों से खराब चल रहे हैं। अमेरिका को उन देशों की ईरान से नजदीकियां पसंद नहीं आतीं जो उसके लिए अहमियत रखते हैं। 

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ब्रिक्स में ईरान के आवेदन को अमेरिका चीन के पैंतरे के रूप में भी देख रहा है। यह बात लुकी-छिपी नहीं है कि चीन हमेशा से अमेरिका को पछाड़ने की कोशिशों में में लगा रहता है। अमेरिकी विरोधी संजाल को मजबूत करने के लिए बीजिंग की कोशिश है कि ईरान को ब्रिक्स का सदस्य बनवा दिया जाए। बता दें कि गत 23-24 जून को ब्रिक्स का 14 वां सम्मेलन हुआ था। जिसमें ईरान राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को निमंत्रण दिया गया था। राष्ट्रपति इब्राहिम ने बिना मौका गंवाए सम्मेलन को संबोधित किया और कोरोना त्रासदी के अलावा जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शांति पर विचार रखे। उन्होंने राष्ट्रों के मध्य बातचीत की अहमियत पर जोर दिया था और शीतयुद्ध की मानसिकता को खत्म करने की बात कही थी। वैश्विक आर्थिकी के इस दौर में ब्रिक्स का खास महत्व है यह बात व्हाइट हाउस से छिपी नहीं है। ब्रिक्स देशों में विश्व की 40 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है ऐसे में विश्व के सकल उत्पाद में इसकी भागीदारी 30 प्रतिशत है। 

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ब्रिक्स के तीन सदस्य देश भारत, चीन,रूस भी परमाणु संपन्न हैं। इन तीनों की एकता किसी भी आर्थिक, राजनयिक और सामरिक संतुलन को पूरी तरह से बदल सकती है। इस समय चीन की अर्थव्यवस्था 150 अरब डॉलर है। ताइवान और प्रशांत महासागरीय द्वीपों पर चीन गिद्ध दृष्टि के परिप्रेक्ष्य में रूस से नजदीकी बढ़ाने के साथ ही ईरान, मलेशिया और तुर्की को साधने का काम कर रहा है। इससे अमेरिका की भृकुटि तनी हुई है।

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