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अदृश्य योगी और शेयर बाजार


अदृश्य योगी और शेयर बाजार

अमित बिश्‍नोई

हमारा देश, संतों महंतों, बाबाओं योगियों का देश है, यह ईश्वर की आराधना में लीन होने वाला एक समाज है मगर समय बदल चूका, देश बदल चूका है, बाबा और योगी भी बदल चुके हैं. मठों और मंदिरों से निकलकर इनका अब राजनीति के मंदिरों में बसेरा होने लगा है मगर अब मैं जो आपके बताने जा रहा हूँ वह किसी करिश्में से कम नहीं है, एक अदृश्य योगी की बात, जिसको किसी ने कभी देखा नहीं, बताते हैं कि उसकी कोई देह नहीं, वह कोई भी रूप धर सकता है, कहीं भी जा सकता है. कहते हैं वह हिमालय के पहाड़ों में विचरण करता है.

दरअसल इस अदृश्य योगी का अभी हाल में ही पता चला है. दिलचस्प बात यह है कि 303 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को जिसे हम शेयर बाजार भी कहते हैं 2013 से 2016 तक इस अदृश्य योगी के दिशानिर्देशों में चलाया गया. लगभग चार सालों तक इस अदृश्य योगी के कहने पर देश का इतना बड़ा शेयर बाजार चलता रहा. इस कहानी को जानकर आँखों के सामने किसी फिल्म का प्लाट घूम जाता है।

इस कहानी में महज 15 लाख रुपये की सैलरी वाले इंसान को 1.38 करोड़ रुपये के पैकेज पर रखा जाता है वह भी बिना योग्यता के, उसके लिए ग्रूप ऑपरेटिंग ऑफिसर का एक पद सृजित किया जाता है, साल दर साल प्रमोशन और महज 3 साल में उसे ग्रूप ऑपरेटिंग ऑफिसर बना दिया जाता है और सैलरी में साल दर साल उछाल और यह सब एक अदृश्य योगी के आदेशों पर.

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शेयर बाजार में रची गई फिल्मी स्टोरी जैसी इस रियल कहानी का मुख्य किरदार तो अदृश्य योगी ही है, इसके बाद आनंद सुब्रमण्यम नाम का वह शख्स जिसे कथित योगी के कहने पर पद सृजित करके नियुक्ति मिलती है और लगातार प्रमोशन मिलते है और तीसरा मुख्य किरदार एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्णा का सामने आता है जो अदृश्य बाबा के कहने पर यह सारे फैसले ले रही थी. यह अदृश्य बाबा भी काफी आधुनिक और टेक्नॉलॉजीजीवी किस्म के थे क्योंकि उनका चित्रा रामकृष्णा से संवाद सिर्फ ई-मेल के द्वारा होता था. बता दें कि चित्रा 2013 से 2016 के दौरान एनएसई की सीईओ रही हैं.

इस अदृश्य बाबा के झमेले को घपला, घोटाला साबित करने में शेयर बाजार को कण्ट्रोल करने वाले सेबी को कई साल लग गए, पिछले हफ्ते ही सेबी ने इस मामले में आर्डर जारी किया और अदृश्य योगी की भक्तिन चित्रा रामकृष्णा पर और कथित योगी के आदेशों पर मौज करने वाले आनंद सुब्रमण्यम पर कुछ करोड़ रूपये का जुर्माना लगाया।

एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्णा भले ही अदृश्य योगी को बिना देह का सिद्धि पुरुष बताती हों मगर सेबी इस बात को नहीं मानती, सेबी के अनुसार अदृश्य योगी की कहानी कोरी कल्पना है जिसे आनंद सुब्रमण्यम ने गढ़ा है. अब आप सोच लीजिये कि एनएसई, जहाँ रोजाना 49 करोड़ ट्रांजेक्शन होते हैं. उसका एक दिन का टर्नओवर लगभग 64 हजार करोड़ रुपये है, उस एनएसई की संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां उस अदृश्य योगी को इस ईमेल की जाती थी.

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अब इतना बड़ा घपला, घोटाला सामने आया है तो राजनीति भी होना लाज़मी है और वह शुरू हो चुकी है. हमेशा की तरह यह तुम्हारे काल का मामला है जैसे आरोपों प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरू हो चूका है लेकिन तीन चार सालों तक किसी अदृश्य योगी द्वारा किसी देश के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को चलाने का कारनामा शायद हमारे देश में ही हो सकता है.

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