नई दिल्ली। रूस के सैनिकों ने पूर्वी लुहांस्क में यूक्रेन के आखिरी गढ़ लिसिचांस्क शहर और आसपास के इलाकों पर कब्जा करने के लिए गोलाबारी तेज कर दी। लुहांस्क के गवर्नर ने बताया कि यूक्रेन के लड़ाके सप्ताह भर से इस शहर को रूसी सैनिकों के कब्जे में जाने से बचाने की कोशिश में हैं। उधर, रूस रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि उसके सैनिकों ने लिसिचांस्क के बाहरी इलाके स्थित तेलशोधन कारखाने पर अपना कब्जा कर लिया है। लुहांस्क के गवर्नर सेरही हैदई ने दावा किया कि अभी लड़ाई जारी है। रूस के अलगाववादी समर्थकों का लुहांस्क और दोनेत्स्क के बड़े हिस्से पर वर्ष 2014 से कब्जा है।
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रूस ने दोनों क्षेत्र को संप्रभु गणराज्यों के तौर पर भी मान्यता दे दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लड़ाई का अंतिम निष्कर्ष क्या होगा। युद्ध में रोज नई परिस्थिति पैदा हो रही हैं। जिसके बाद कुछ कहा नहीं जा सकता। जानकारों का कहना है कि रूस सेना का यूक्रेन के अधिकांश क्षेत्रों पर कब्जा करने का उद्देश्य अभी बचा है। रूस की सेना राजधानी कीव और यूक्रेन को अपनी अधीन करने की योजना बना रहा है। रूस डोनबास में अपनी बढ़त को भुनाने की कोशिश में है। रूसी सैनिक एक बार फिर कीव को भी निशाना बना सकते हैं। यूक्रेन की सेना नुकसान झेल रही है। राष्ट्रपति जेलेंस्की स्वीकार कर चुके हैं कि प्रत्येक दिन 100 के करीब यूक्रेन सैनिकों की मौत हो रही है और लगभग 500 घायल हो रहे हैं।
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मामले में यूक्रेनी नागिरकों का अपना अलग—अलग मत है। कुछ नागरिक चाहते हैं कि संघर्ष जारी रखे तो कुछ शांति का रास्ता अख्तियार करने को कह रहे हैंं यूक्रेन की तमाम चुनौतियों के साथ यह भी सवाल उठ रहा है कि यूक्रेन युद्ध में जीत के करीब पहुंच सकता है। क्या यूक्रेनी सेना रूस को वहां खदेड़ सकती हैं। यूक्रेन राष्ट्रपति जेलेंस्की दावा तो जरूर करते हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति कई मौकों पर कह चुके हैं कि यूक्रेन निश्चित तौर पर युद्ध जीतेगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यूरोपीय और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे युद्ध के स्तर पर असर पड़ा है। यूक्रेन को यूरोपीय और अमेरिका से लगातार सैन्य सहायता प्राप्त हो रही है। अब यूक्रेन ने अपनी रक्षात्मक नीति को और आक्रमण नीति में बदल दिया है।

