इस साल अमावस्या पर ऐसा योग सालों-साल तृप्त रहेंगे पितृ

 
इस साल अमावस्या पर ऐसा योग सालों-साल तृप्त रहेंगे पितृ इस साल अमावस्या पर ऐसा योग सालों-साल तृप्त रहेंगे पितृ
  • गजछाया योग समेत सर्वार्थसिद्धि योग होने से बन रहे दुर्लभ योग, 100 साल बाद बने ऐसे संयोग

पितृपक्ष की अमावस्या पर इस बार कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन योगों में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से वह कई सालों तक तृप्त रहते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस साल 6 अक्टूबर को पितृ पक्ष की अमावस्या पड़ रही है। इसे मोक्षदायिनी अमावस्या भी कहते हैं। सर्वपितृ अमावस्या पर इस साल जहां गज छाया योग बन रहा है। वही सर्वार्थ सिद्धि योग होने से यह काफी शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषी मानते हैं कि यह योग 100 साल बाद बना है। जब कई अच्छे से संयोगों में पितरों का श्राद्ध तर्पण कर उन्हें प्रसन्न और तृप्त किया जा सकता है।

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मिलेगा पितरों का आशीर्वाद

ज्योतिषियों के अनुसार पितृ पक्ष की अमावस का आगमन 5 अक्टूबर की शाम को 7:05 से शुरू हो जाएगा। 6 अक्टूबर को शाम 4:35 तक अमावस्या तिथि रहेगी। इस तिथि पर गज छाया योग 6 अक्टूबर को शाम 4:35 तक रहेगा। इस साल इन योगों के अलावा कई अन्य योग भी बन रहे हैं।।कहा जाता है कि इन विशेष संयोगों में स्नान, दान और जप करने से पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि इन योगों में पितरों को तृप्त करने से वह आने वाले 13 साल तक प्रसन्न रहते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता रहता है।

गजछाया योग में जरूर करें दान

ज्योतिषयों के मुताबिक सर्वपितृ अमावस्या पर गजछाया योग हमेशा नहीं बनता है। कई सालों में एक बार विशेष नक्षत्रों के मिलने से यह योग बनते हैं। कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी तिथि पर सूर्य व चंद्रमा हस्त नक्षत्र में आते हैं तब ऐसे संयोग बनते हैं। इन योगों का वर्णन अग्नि पुराण, स्कन्दपुराण, मत्स्य पुराण महाभारत समेत कई अन्य पुराणों में भी मिलता है। माना जाता है कि यह अत्यंत दुर्लभ योग हैं। इस योग में तर्पण करने से वंश वृद्धि होती है वहीं दान पुण्य का भी विशेष महत्व है। इस योग में दान अवश्य करना चाहिए इससे पित्र प्रसन्न होते हैं। घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है।

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भूले-बिसरे पितरों का भी करें तर्पण

सर्वपितृ अमावस्या पर इस बार ब्रह्म योग भी बनेगा। अश्वनी कृष्ण पक्ष की इस तिथि पर भूले बिसरे पितरों का भी तर्पण अवश्य करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि गज योग व अन्य योग होने से ऐसे सभी पितरों को शांति मिलेगी और उनके आशीर्वाद से जीवन में वैभव और तरक्की का आगमन भी होगा। पूरे मन से विधि विधान सहित इस दिन भूले बिसरे सभी पितरों का श्राद्ध तर्पण किया जाना आवश्यक होता है। पितरों का आशीर्वाद मिलने से जीवन में प्रसन्नता बनी रहती है और मनुष्य उच्च कोटि का जीवन व्यतीत करता है।