बढ़ती मंहगाई से देश भले ही त्राहि त्राहि कर रहा हो लेकिन RBI गवर्नर शक्तिकांत दास की नज़र में उन्हें मंहगाई के मोर्चे पर सफलता मिली है और अब इसे टिकाऊ बनाने की ज़रुरत है. RBI ने शुक्रवार को MPC बैठक का जो ब्यौरा जारी किया उसमें वैश्विक स्तर पर राजनीतिक घटनाक्रम से कीमतों पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई। बता दें कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर रेपो को 6.5 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया था।
शक्तिकांत दास ने कहा कि महंगाई को कम करने के लिए पिछले दो वर्षों में जो लाभ हुआ है उसे बरकरार रखना होगा। RBI गवर्नर के मुताबिक पीछे दो साल में मंहगाई पर सरकार ने काबू पाया है. उनका कहना है कि अब इसे मैंटेन करने की ज़रुरत है और टिकाऊ आधार पर सकल मुद्रास्फीति को चार फीसदी के लक्ष्य तक लाने के लिए काम करना होगा। जानकारी के मुताबिक एमपीसी के छह सदस्यों में से पांच ने नीतिगत दर में यथास्थिति के पक्ष में मतदान किया था, इसका मतलब ये सर्वसम्मत का फैसला नहीं था।
जानकारी के मुताबिक एमपीसी सदस्य जयंत आर वर्मा नीतिगत दर में यथास्थिति के पक्ष में नहीं थे, उन्होंने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की वकालत की थी। उनकी तर्क था कि अधिक ब्याज दर से ग्रोथ प्रभावित होती है। ब्योरे के मुताबिक बैठक में RBI गवर्नर ने कहा कि महंगाई 2024-25 में घटकर 4.5 प्रतिशत हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और कमोडिटी की कीमतों तथा सप्लाई चेन्स पर उनके प्रभाव भी महंगाई को लेकर अनिश्चितताओं को बढ़ा रहे हैं।
