Business News: देश में सब्जियों के दाम आसमान पर हैं। कुछ राज्यों में टमाटर 150 से 200 रुपए प्रति किलो तक हैं। हरी मिर्च की बात करें तो वह भी तीखी हो गई है। कुछ राज्यों में हरी मिर्च 450-500 रुपए प्रति किलो बिक रही है। दिल्ली और आसपास के राज्यों में इसके दाम 300-350 रुपए प्रति किलोग्राम हैं। महंगाई की दौड़ में नींबू पीछे नहीं है। तीन-चार महीने पहले 10 रुपए में तीन नींबू मिलते थे। अब 10 रुपए में एक या दो नींबू मिलते हैं। 80 से 100 रुपए किलो बिकने वाला नींबू अब बाजार में 150 से 180 रुपए प्रति किलोग्राम है। महंगाई के बीच बाजार में ‘नींबू-मिर्च’ का टोटका, अपनी जगह बनाए है। घर, दुकान, दफ्तर या बड़े वाहनों पर नींबू-मिर्च टंगी हुई प्रतिदिन ही दिखाई देगी। चाहे सप्ताह में दो दिन हो या फिर, प्रतिदिन इस ‘टोटके’ का कारोबार एक साल में 40 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसके कारण 60 लाख लोगों को रोजगार मिलता है।
बुरी नजर नहीं लगती
लोगों का मानना है कि नींबू-मिर्च से बुरी नजर नहीं लगती। टोटके में आमतौर पर सात हरी मिर्च और एक नींबू होता है। टोटके की कीमत दस से बीस रुपए होती है। अगर कारोबार ठीक-ठाक है तो दुकान या प्रतिष्ठान मालिक रोजाना नींबू-मिर्च के टोटके का उपयोग करता है। छोटा मोटा धंधा करने वाले लोग इस टोटके को मंगलवार और शनिवार करते हैं। कुछ लोग इसे शनिवार को लटकाते हैं। खास बात है कि कई सरकारी-गैर सरकारी संस्थान, अस्पताल, बैंक, मॉल, दुकान, शोरूम और रेहड़ी-फेरी वाले इस टोटके का इस्तेमाल करते हैं। धर्म जाति भले कुछ हो, मगर कारोबारी यह टोटका करते जरूर हैं।
एक टोटके की कीमत दस से बीस रुपए
एक टोटके की कीमत दस से बीस रुपए होती है। अधिकांश शहरों में यह पंद्रह रुपए में मिलता है। रेहडी वाले दस रुपए में इसको खरीदते हैं। दस रुपए वाले टोटके में नींबू छोटे आकार का होता है और मिर्चे सूखी हुई होती हैं। जब दाम कम है तो मिर्चों का आकार छोटा होता है। बीस रुपए कीमत पर बड़ा एवं ताजा नींबू होता है। मिर्च हरी एवं बड़े आकार की होती है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज (कैट) महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि दिल्ली में लगभग 12 लाख दुकानें या व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। अगर इनमें से अधिकांश दुकानों टोटका लगाता है। तो उसके लिए कम से कम 6,200 व्यक्ति इस काम में लगते हैं। कई लोग घरों एवं दफ्तरों पर नींबू मिर्च लटकाते हैं। एक आदगी सुबह चार बजे उठकर करीब दो सौ टोटके बनाता है। इसके बाद वह सुबह दस बजे तक करीब 170 दुकानों पर नींबू-मिर्च टोटका लटका आता है।
देशभर में इतने रुपए पहुंचा टोटके का कारोबार
कैट महासचिव के मुताबिक, देशभर में आठ करोड़ से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। ये संख्या तो उन दुकानों या व्यापारिक संस्थानों की है, जो कैट से जुड़े हुए हैं। इनमें से अधिकांश दुकानों या प्रतिष्ठानों पर टोटका लगाया जाता है। इस हिसाब से करीब 80 करोड रुपए का कारोबार होता हैं। देश में पांच करोड़ से अधिक हॉकर, रेहड़ी-फेरी वाले हैं। ये टोटका मंगवाते हैं। इनके चलते ‘टोटके’ से बीस करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होता है। नतीजा, करीब पौने तीन लाख लोगों को रोजगार मिलता है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में टोटके का इस्तेमाल होता है। प्राइवेट बस-ट्रक पर टोटका रोजाना लगता है। ट्रक सुबह जहां खड़ा होता है, वहीं टोटका लगाने वाले पहुंच जाते हैं। करीब 85 लाख ट्रकों पर नींबू मिर्च रोज लटकाए जाते हैं। इससे करीब आठ करोड़ रुपए कारोबार होता है। यहां पर डेढ़ लाख लोगों को इससे काम मिलता है।
शास्त्र या पुराणों में जिक्र नहीं
ज्योतिष की जानकारी रखने वाले पंडित गोविंद शास्त्री ने इस विषय में बातचीत के बताया कि इस टोटके का शास्त्र या पुराणों में जिक्र नहीं है। कुछ लोग इसे रोजाना अपने घर, दुकान या व्यापारिक प्रतिष्ठान पर टांगते हैं। कई दुकानदार ऐसे हैं जो मंगलवार और शनिवार को टांगते हैं। ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि इसके लिए कौन सा दिन शुभ और कौन सा नहीं। लोगों अपनी इच्छा और सहूलियत पर निर्भर करता है। वे इसे कैसे और कब मंगवाते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह जादू-टोने काटता है। जबकि कुछ लोगों की सोच है कि यह व्यक्ति और कारोबार को बुरी नजर से बचाता है। शास्त्री के मुताबिक, तंत्र विद्या में नींबू को बलि मानते हैं। पूजा के दौरान जो वस्तु इस्तेमाल होती है, उसमें जैसे जायफल या नींबू, आदि को जीवधारी बताया है। इसे व्यक्तिगत तौर पर नहीं मानता, लेकिन मान्यता है कि नींबू का प्रयोग मारण के तौर पर किया जाता है।
यह मान्यता
माना जाता है कि नींबू खट्टा और मिर्च तीखा स्वाद बुरी नजर वाले व्यक्ति की एकाग्रता भंग करता है। इसके चलते वह अधिक समय तक घर या दुकान नहीं देखता है। जानकारों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति खट्टी चीज़ें इमली, नींबू आदि की ओर देखता है, तो उसे स्वाद महसूस होता है। ऐसे में व्यक्ति का ध्यान अन्य चीजों से हटकर उन पर आता है। इससे बुरी नजर वाले व्यक्ति की एकाग्रता भंग हो जाती है। उसकी बुरी नजर का प्रभाव टलता है।

