अमित बिश्नोई
इंदौर टेस्ट के दूसरे दिन टीम इंडिया सिर्फ दो सेशन में ही ढेर हो गयी. ऑस्ट्रेलिया को अब जीत के लिए 76 रनों का लक्ष्य मिला है और पूरे तीन दिन का खेल शेष बचा है. सवाल बड़ा यह है कि लगातार तीसरी जीत के लिए क्या 76 रन काफी हैं, क्या भारत इस छोटे से लक्ष्य की रक्षा कर पायेगी। क्या फिर 11 रनों में 6 विकेट लेने जैसा कारनामा कर पाएगी? सवाल बड़ा मुश्किल है, ऐसा हो भी सकता है. क्रिकेट ऐसा खेल है जिसमें सबकुछ संभव है, भारत भी ऑस्ट्रलिया में 36 रनों पर आउट हो चुकी है.
उम्मीद अभी बाकी है
टीम इंडिया ने फिलहाल मैच को नहीं छोड़ा है, कप्तान भी पुरउम्मीद हैं और खिलाड़ी भी. इतना छोटा लक्ष्य होने के बावजूद उनके कंधे झुके नहीं हैं और उसकी वजह शायद यह है कि ऑस्ट्रेलिया की टीम एकबार फिर कोलैप्स कर सकती। जैसा दिल्ली में किया, दूसरी पारी में सिर्फ 28 रनों के अंदर सात विकेट गँवा बैठे, जैसा आज किया जब सिर्फ 11 रनों में 6 विकेट गँवा बैठे। तो जो घटना दो बार हो सकती है वो तीसरी बार क्यों नहीं हो सकती है, उम्मीद पर दुनिया कायम है, वैसे हमारे पास और कोई विकल्प भी तो नहीं है.
कैसे आये ये नौबत
यह नौबत कैसे आयी यह एक अलग विषय है. होता है, कभी कभी सामने वाले के लिए जो रणनीति बनाई जाती है वो खुद पर ही भारी पड़ जाती है लेकिन यह बात एकदम सही है कि भारतीय बल्लेबाज़ों ने स्थिति और पिच के हिसाब से बल्लेबाज़ी नहीं की. सिवाए पुजारा के किसी ने पहली पारी की नाकामी से सबक नहीं सीखा। शुभमण गिल जिस तरह आउट हुए उसे किसी भी रूप में सही नहीं कहा जा सकता। इंदौर की पिच पर टिका जा सकता है यह उस्मान ख्वाजा ने भी दिखाया और चेतेश्वर पुजारा ने भी. फिर क्या वजह है कि टीम इंडिया की इतनी लम्बी बैटिंग लाइन दो दो बार फ्लॉप हो गयी. टीम में आल राउंडर की भरमार है. 9 नंबर तक बल्लेबाज़ी है. लेकिन जब स्कोर की तरफ देखते हैं तो 109 और 163 ही दिखाई देता है. जिस टीम में इतने बल्लेबाज़ भरे पड़े हों वो क्या इतने छोटे टोटलों को जस्टिफाई कर सकती है.
ऑस्ट्रेलिया के एक और कोलैप्स का इंतज़ार
कल हो सकता है कि ऑस्ट्रेलिया इस लक्ष्य को पूरा न कर सके लेकिन इससे आपका खराब प्रदर्शन अच्छा तो नहीं हो सकता। क्या पूरी श्रंखला गेंदबाज़ों के सहारे ही छोड़ रखी है, बल्लेबाज़ों की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है क्या? यह टेस्ट अगर भारत हार जाता है तो पता नहीं इसका अहमदाबाद के टेस्ट पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या प्रभाव पड़ेगा WTC फाइनल की उम्मीदों पर. बेशक ऑस्ट्रेलिया अगर यह टेस्ट जीतती है तो उसके ऊपर से बहुत बड़ा दबाव हट सकता है और दबाव हटने से टीम का पूरा खेल ही बदल जाता है. वैसे हम तो यही चाहेंगे कि ऑस्ट्रेलिया एक और कोलैप्स का शिकार हो बाकी कल का इंतज़ार है.
